नई दिल्ली, 8 जुलाई (आईएएनएस)। राजस्थान के श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और तस्करी के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को त्वरित और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर की अध्यक्षता में इस मामले को लेकर सुनवाई आयोजित की गई। राष्ट्रीय महिला आयोग ने जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक से 15 दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने निर्देश दिए कि निर्धारित समय सीमा के भीतर आरोप पत्र दाखिल किया जाए, ताकि पीड़िता को जल्द न्याय मिल सके।
सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि यह घटना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही, पुलिस व्यवस्था में कमी और निगरानी तंत्र की विफलता को दर्शाती है। आयोग ने पुलिस, चिकित्सा विभाग और फोरेंसिक टीम के बीच बेहतर तालमेल बनाकर जांच को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
आयोग ने विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच की भी जानकारी ली। अधिकारियों की ओर से बताया गया कि अब तक इस मामले में 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों में होटल संचालक, मैनेजर और अन्य लोग शामिल हैं, जिन पर कथित तौर पर अपराध में शामिल होने का आरोप है। आयोग ने बाकी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और जांच को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई में श्रीगंगानगर के जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक, एसआईटी प्रभारी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक समेत बाल कल्याण समिति के अधिकारी मौजूद रहे। आयोग की अध्यक्ष ने मामले में हुई गंभीर चूकों पर चिंता जताई और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए।
आयोग ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि जिले में बिना पंजीकरण वाले और अवैध रूप से चल रहे होटलों व अन्य संस्थानों की पहचान कर 15 दिनों के भीतर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही, ऐसे संस्थानों को नियमों का उल्लंघन कर संचालित होने देने वाले जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने को कहा गया है।
पुलिस अधीक्षक को स्थानीय पुलिस व्यवस्था, गश्त और निगरानी प्रणाली में हुई कमियों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि नाबालिग पीड़िता को समय पर बाल कल्याण समिति के सामने पेश नहीं किया जाना गंभीर विषय है और इसकी जांच होनी चाहिए।
बाल कल्याण समिति को पीड़िता की सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। आयोग ने जिला प्रशासन और समिति को पीड़िता को मिलने वाली आर्थिक सहायता, मुआवजे और पुनर्वास की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
–आईएएनएस
एसएचके/पीएम
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