Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट में आज यानी सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता वकील को कड़ी फटकार लगाई। वकील ने अदालत से अपील की थी कि एक समिति बनाकर यह जांच कराई जाए कि क्या प्याज और लहसुन को तामसिक भोजन माना जाना सही है। अदालत ने इस मांग पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की याचिकाएं अनावश्यक रूप से न्यायालय का समय और संसाधन खर्च करती हैं।
Supreme Court News: CJI सूर्यकांत ने जताई नाराजगी
रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने हुई। याचिका पर बहस के दौरान जब वकील सचिन गुप्ता ने अपनी दलीलें रखीं, तो मुख्य न्यायाधीश ने उनसे सवाल किया कि वे जैन समुदाय की भावनाओं को क्यों ठेस पहुंचाना चाहते हैं।
सीजेआई ने कहा कि अगर किसी समुदाय की धार्मिक मान्यताएं और खानपान से जुड़ी परंपराएं हैं, तो इस तरह की याचिका से उनकी भावनाएं आहत हो सकती हैं। अदालत ने साफ कहा कि न्यायपालिका का समय ऐसे मुद्दों पर खर्च नहीं किया जाना चाहिए जिनका कानूनी आधार कमजोर हो।
वकील ने दिया यह तर्क
वकील सचिन गुप्ता ने अपनी याचिका का समर्थन करते हुए कहा कि यह एक सामान्य सामाजिक समस्या है। उन्होंने दावा किया कि गुजरात में एक दंपति के बीच तलाक का कारण भोजन में प्याज का इस्तेमाल बना था। उनका कहना था कि इस विषय पर स्पष्टता होना जरूरी है। हालांकि अदालत ने इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना और कहा कि ऐसे उदाहरणों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करना उचित नहीं है।
कोर्ट ने दी सख्त चेतावनी
सुनवाई के दौरान बेंच ने वकील को कड़ी चेतावनी भी दी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि भविष्य में इसी तरह की याचिका फिर से दाखिल की गई, तो अदालत सख्त कदम उठा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत का समय गंभीर और महत्वपूर्ण मामलों के लिए होना चाहिए।
यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की गई थी। इसमें मांग की गई थी कि सुप्रीम कोर्ट एक विशेषज्ञ समिति बनाए जो यह जांच करे कि प्याज और लहसुन वास्तव में तामसिक भोजन की श्रेणी में आते हैं या नहीं और इनमें कौन-कौन से नकारात्मक तत्व होते हैं।
जैन समुदाय की खानपान परंपरा
याचिका में यह भी कहा गया था कि जैन समुदाय के लोग प्याज, लहसुन और जमीन के नीचे उगने वाली कई सब्जियों का सेवन नहीं करते। उनकी धार्मिक मान्यता के अनुसार इन्हें तामसिक भोजन माना जाता है, इसलिए वे अपने भोजन में इनका उपयोग नहीं करते।
अन्य तीन याचिकाएं भी खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने वकील द्वारा दायर की गई तीन अन्य जनहित याचिकाओं को भी खारिज कर दिया। इनमें शराब और तंबाकू में मौजूद हानिकारक तत्वों के नियमन की मांग, संपत्ति के पंजीकरण को अनिवार्य करने के निर्देश और कुछ भाषाओं को शास्त्रीय भाषा घोषित करने की मांग शामिल थी। अदालत ने इन याचिकाओं को भी गैरजरूरी बताते हुए कहा कि ऐसी याचिकाएं न्यायालयों पर अनावश्यक दबाव बढ़ाती हैं।
अदालत की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के अंत में बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर याचिकाकर्ता स्वयं वकील नहीं होते, तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायपालिका का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए और जनहित याचिका का उद्देश्य केवल गंभीर और सार्वजनिक महत्व के मामलों को उठाना होना चाहिए।
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