Tamilnadu Politics Update: तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों सरकार गठन को लेकर हलचल तेज हो गई है। इस बीच राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने दूसरे दिन यानी गुरुवार को भी स्पष्ट किया कि तमिलगा वेट्ट्री कड़गम (TVK) के पास अभी सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत नहीं है। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। बता दें कि राजभवन की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, राज्यपाल ने टीवीके प्रमुख सी. जोसेफ विजय को चेन्नई स्थित लोक भवन में बुलाया था। इस मुलाकात में उन्होंने साफ कहा कि विधानसभा में बहुमत का समर्थन अभी तक साबित नहीं हुआ है। इसलिए मौजूदा स्थिति में सरकार बनाने का दावा मजबूत नहीं माना जा सकता।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है। टीवीके ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा किया है, लेकिन दोनों के पास मिलाकर करीब 112 विधायक ही हैं। यानी बहुमत के आंकड़े से वे अभी भी कुछ सीट पीछे हैं। ऐसे में राजनीतिक समीकरण लगातार बदलते नजर आ रहे हैं।
Tamilnadu Politics Update: समर्थन जुटाने की कोशिश
टीवीके प्रमुख विजय ने अन्य दलों से भी समर्थन मांगना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को पत्र लिखकर “प्रगतिशील सरकार” के गठन के लिए सहयोग मांगा है। पार्टी के नेता वीरपांडियन ने बताया कि इस मुद्दे पर फैसला लेने के लिए आपात बैठक बुलाई गई है। इस बैठक के बाद ही पार्टी अपना अंतिम रुख तय करेगी। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि एमके स्टालिन के साथ बैठक केवल एक सौहार्दपूर्ण मुलाकात थी। वह तमिलनाडु में हमारे गठबंधन के प्रमुख हैं।
वहीं इस पूरे घटनाक्रम में विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) भी अहम भूमिका निभा रही है। पार्टी प्रमुख थोल. थिरुमावलवन ने राज्यपाल से मुलाकात कर विजय को सरकार बनाने का मौका देने की मांग की है। उनका कहना है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते टीवीके को पहले अवसर मिलना चाहिए और वह विधानसभा में बहुमत साबित कर सकती है।
भाजपा पर हस्तक्षेप का आरोप
वीसीके और टीवीके नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी पर राज्य की राजनीति में दखल देने का आरोप लगाया है। विजय ने सीधे तौर पर अमित शाह और नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए कहा कि वे तमिलनाडु की राजनीति में भ्रम पैदा कर रहे हैं। उनका कहना है कि जनता ने टीवीके को सबसे बड़ी पार्टी बनाया है, इसलिए उसे सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए। विजय और उनके सहयोगियों ने राज्यपाल के रवैये पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि राज्यपाल द्वारा पहले से ही बहुमत साबित करने की शर्त रखना सही नहीं है। उनके मुताबिक, संवैधानिक परंपरा के अनुसार सबसे बड़ी पार्टी को पहले शपथ लेने का मौका मिलना चाहिए और बाद में वह सदन में बहुमत साबित करे।
बदला हुआ राजनीतिक समीकरण
इस चुनाव में टीवीके ने राज्य की पारंपरिक राजनीति को बड़ा झटका दिया है। लंबे समय से तमिलनाडु की राजनीति में एम.के. स्टालिन की डीएमके और एआईएडीएमके का दबदबा रहा है, लेकिन इस बार टीवीके के उभार ने तस्वीर बदल दी है। हालांकि, अभी भी सरकार गठन के लिए जरूरी समर्थन जुटाना उसके लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। कुल मिलाकर, तमिलनाडु में राजनीतिक स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। आने वाले दिनों में सहयोगी दलों के फैसले और संभावित नए गठबंधन ही तय करेंगे कि राज्य में अगली सरकार किसकी बनेगी।
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