राउज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार को कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत दर्ज शिकायत के बिंदु पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की दलीलें सुनीं। अदालत कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज शिकायत पर ईडी की दलीलें सुन रही है।
प्रवर्तन निदेशालय ने प्रस्तुत किया कि “अगर सबूत मिले तो अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को आरोपी बनाया जा सकता है।”
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने ईडी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू की दलीलें सुनीं। मामले को 3 जुलाई को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
आरोपियों के खिलाफ अपराध बनता है
ईडी ने तर्क दिया कि यंग इंडियन को एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड को अपने कब्जे में लेने के लिए बनाया गया था, जिसकी संपत्ति 2000 करोड़ रुपये है। यंग इंडियन के लाभार्थियों में कांग्रेस नेता भी शामिल थे। एएसजी राजू ने यह भी तर्क दिया कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपियों के खिलाफ अपराध बनता है। एएसजी एसवी राजू ने कहा कि शिकायत में किए गए दावे मामले का आधार हैं। संज्ञान पर विचार करते समय इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए। यह भी कहा गया कि डिस्चार्ज के लिए सीमा संज्ञान लेने की सीमा से अधिक है। समन जारी करने का प्राथमिक मामला पूरी तरह से अलग है। बहस के दौरान, एएसजी ने प्रवर्तन निदेशालय की शिकायत (मामले) का हवाला दिया और कहा कि यह एक सत्र परीक्षण योग्य मामला है। एएसजी ने कहा कि प्रत्येक आरोपी के खिलाफ अपराध बनता है।
90 करोड़ रुपये का ऋण दिया
ईडी ने कहा कि गांधी यंग इंडियन के लाभार्थी थे, जिसे एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) की संपत्ति हड़पने के लिए बनाया गया था। यह भी कहा गया कि एआईसीसी द्वारा एजेएल को 90 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया था, जिसे बाद में यंग इंडियन ने अपने अधीन कर लिया, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी शेयरधारक थे। अदालत ने पूछा कि 2010 में यंग इंडियन के गठन से पहले एजेएल की शेयरधारिता कितनी थी।


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