टीएमसी बिखर चुकी है, ममता बनर्जी का अस्तित्व खत्म हो गया: राम कृपाल यादव

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पटना, 10 जून (आईएएनएस)। बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ने पश्चिम बंगाल की राजनीति और बिहार के सियासी घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर जुबानी साधा। एनडीए सरकार को समर्थन देने वाले कथित 20 बागी टीएमसी सांसदों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि टीएमसी अब पूरी तरह कमजोर और बिखर चुकी है। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में राम कृपाल यादव ने कहा कि टीएमसी, यानी ममता बनर्जी की पार्टी खंड-खंड होकर विखंडित हो गई है। पार्टी पूरी तरह से कमजोर पड़ चुकी है और अब बिखर गई है। टीएमसी की पहचान खत्म हो गई…

पटना, 10 जून (आईएएनएस)। बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ने पश्चिम बंगाल की राजनीति और बिहार के सियासी घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर जुबानी साधा। एनडीए सरकार को समर्थन देने वाले कथित 20 बागी टीएमसी सांसदों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि टीएमसी अब पूरी तरह कमजोर और बिखर चुकी है।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में राम कृपाल यादव ने कहा कि टीएमसी, यानी ममता बनर्जी की पार्टी खंड-खंड होकर विखंडित हो गई है। पार्टी पूरी तरह से कमजोर पड़ चुकी है और अब बिखर गई है। टीएमसी की पहचान खत्म हो गई है और एक नई टीएमसी सामने आई है, जो एनडीए के साथ है। ममता दीदी खत्म हो चुकी हैं, उनका कोई अस्तित्व नहीं बचा है। अभिषेक बनर्जी की दादागिरी भी समाप्त हो गई है।

वहीं, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर भी उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद एक संवैधानिक पद है और इसकी गरिमा बनाए रखी जानी चाहिए।

राम कृपाल यादव ने कहा कि विपक्ष के नेता का पद एक संवैधानिक पद है। इसे कमतर नहीं आंकना चाहिए और इसकी गरिमा बनाए रखी जानी चाहिए। कर्पूरी ठाकुर और लालू प्रसाद यादव सहित कई सम्मानित नेताओं ने इस पद को सुशोभित किया है। ऐसे बयान देकर आप अपना ही कद क्यों घटा रहे हैं? उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री का पद भी एक संवैधानिक पद है और मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री ही होता है। यह ठीक है कि आप विपक्ष में हैं, लेकिन अपने पद की गरिमा को कम नहीं करना चाहिए। इससे दुनिया में जगहंसाई हो रही है और सवाल आप पर ही उठ रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि बोली, वचन और भाषा, इन सबमें व्यक्ति को मर्यादा और संतुलन बनाए रखना चाहिए। विपक्ष का नेता होने का मतलब यह नहीं है कि आप किसी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करें या अमर्यादित भाषा का प्रयोग करें। क्या इसकी इजाजत है?

–आईएएनएस

पीएसके

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