नई दिल्ली, 24 अगस्त (आईएएनएस)। देश में उच्च व तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 21 शिक्षकों और संकाय सदस्यों को सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में इन शिक्षकों को पुरस्कार प्रदान करेंगी।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस बार पुरस्कार की खास बात यह है कि इसमें देश के आईआईटी, आईआईएसईआर, विश्वविद्यालयों, मेडिकल संस्थानों और पॉलिटेक्निक संस्थानों के शिक्षक शामिल हैं। यानी उच्च शिक्षा में पढ़ाने के साथ शोध, नवाचार और समाज तक शिक्षा की पहुंच बनाने वाले शिक्षकों को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी गई है। इस वर्ष चुने गए 21 शिक्षकों में 12 केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों, 5 राज्य विश्वविद्यालयों और 4 पॉलिटेक्निक संस्थानों से हैं। केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों से चुने गए शिक्षकों में आईआईटी रुड़की की प्रो. अवलोकिता अग्रवाल आईआईटी हैदराबाद की प्रो. कीर्ति चंद्र साहू, बिट्स पिलानी की प्रो. विनय चमोला, आईआईटी भुवनेश्वर से डॉ. श्रीकांत गोल्लापुड़ी, आईआईटी गांधीनगर से डॉ. मिथुन राधाकृष्ण व आईआईएसईआर भोपाल से प्रो. सौरव दत्ता का चयन किया गया है।
वहीं, आईआईटी बॉम्बे के प्रो. विक्रम विशाल, राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय, गांधीनगर के प्रो. सरवैया जयराजसिंह इंद्रजीत सिंह, आईआईटी कानपुर प्रो. के शंकर प्रसाद रथ, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से डॉ. मनीषा निगम व जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज वर्धा के डॉ. अमर मोहनराव ताकसांडे भी इस सम्मान के लिए चुने गए हैं। इनके अलावा राज्य विश्वविद्यालयों की श्रेणी में 3 सरकारी और 2 निजी संस्थानों के शिक्षकों का चयन हुआ है। पॉलिटेक्निक के 4 शिक्षक भी सम्मानित किए जाएंगे। पॉलिटेक्निक संस्थानों से चुने गए चार शिक्षकों में 2 सरकारी और 2 निजी पॉलिटेक्निक संस्थानों से हैं।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए नामांकन राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आमंत्रित किए गए थे। नामांकन की प्रक्रिया 26 मई से 20 जुलाई 2026 तक चली। इस बार नामांकन में स्वयं नामांकन, संस्थान द्वारा नामांकन और सहकर्मियों द्वारा नामांकन की व्यवस्था की गई थी। इसका उद्देश्य जनभागीदारी को बढ़ावा देना था। पुरस्कार के लिए केवल अच्छा पढ़ाने को ही आधार नहीं बनाया गया। शिक्षकों के प्रदर्शन का कई स्तरों पर मूल्यांकन किया गया। इनमें पढ़ाने और सीखने की प्रभावशीलता, समाज और समुदाय तक पहुंच बनाने वाली गतिविधियां, शोध और नवाचार, प्रायोजित शोध, संकाय विकास कार्यक्रम व परामर्श और शिक्षण संबंधी योगदान को भी महत्व दिया गया है।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, चयन की प्रक्रिया भी दो चरणों में हुई। पहले प्रारंभिक खोज-सह-छंटनी समिति ने नामांकनों की जांच कर योग्य उम्मीदवारों की प्रारंभिक सूची तैयार की। इसके बाद जूरी समिति ने अंतिम पुरस्कार विजेताओं का चयन किया। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार में उच्च शिक्षा संस्थानों और पॉलिटेक्निक के शिक्षकों को शामिल करने का फैसला 2023 में किया गया था। इससे पहले राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मुख्य रूप से स्कूल शिक्षकों तक सीमित था। उच्च शिक्षा के शिक्षकों को इसमें शामिल करने का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सोच के अनुरूप शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
सरकार का मानना है कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को पुरस्कार और सम्मान मिलने से शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है। इस वर्ष की सूची की एक खास बात यह भी है कि इसमें इंजीनियरिंग से लेकर चिकित्सा, विज्ञान, संस्कृत, मणिपुरी नृत्य, जनसंचार और योग जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में योगदान देने वाले शिक्षक शामिल हैं। इस तरह राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार उच्च शिक्षा में पढ़ाने वाले शिक्षकों के साथ-साथ शोध और विषयगत विशेषज्ञता के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वालों को भी राष्ट्रीय मंच पर सम्मान दे रहा है।
–आईएएनएस
जीसीबी/डीकेपी
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)


Download Android App
Download iOS App



