वंदे मातरम विवाद पर रविशंकर प्रसाद का कांग्रेस पर हमला, बोले-आजादी के आंदोलन पर एकाधिकार का दावा बंद करें

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नई दिल्ली,18 (आईएएनएस)। वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। भाजपा सांसद और वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी राष्ट्रीय गीत और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को लेकर दोहरा रवैया अपना रही है। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस मुख्यालय पर प्रेसवार्ता कर सोनिया गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान ऐसा लगा कि सोनिया गांधी पूरे वंदे मातरम के गायन पर आपत्ति जता रही थीं। हालांकि, कांग्रेस की ओर से बाद में इसका अलग स्पष्टीकरण दिया गया…

नई दिल्ली,18 (आईएएनएस)। वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। भाजपा सांसद और वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी राष्ट्रीय गीत और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को लेकर दोहरा रवैया अपना रही है।

भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस मुख्यालय पर प्रेसवार्ता कर सोनिया गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान ऐसा लगा कि सोनिया गांधी पूरे वंदे मातरम के गायन पर आपत्ति जता रही थीं। हालांकि, कांग्रेस की ओर से बाद में इसका अलग स्पष्टीकरण दिया गया था।

रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस के मीडिया प्रमुख द्वारा दिए गए उस स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए कहा कि सोनिया गांधी केवल खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था कर रही थीं, यह तर्क पूरी तरह गलत है।

भाजपा सांसदों ने इसके बाद गोवा में कांग्रेस के एक कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वहां भी वंदे मातरम के केवल दो पद गाए गए। प्रसाद ने इसे कांग्रेस की कथित विचारधारा और उसके रवैये से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि आखिर राष्ट्रीय गीत को लेकर पार्टी का दृष्टिकोण क्या है।

उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस इस तरह की गतिविधियां करती रहेगी तो उसे भारत के स्वतंत्रता आंदोलन पर एकाधिकार का दावा करना बंद कर देना चाहिए। प्रसाद के मुताबिक, वंदे मातरम देश के स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला राष्ट्रीय गीत रहा है और इसकी ऐतिहासिक भूमिका को राजनीतिक सुविधा के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।

रविशंकर प्रसाद ने मल्लिकार्जुन खड़गे के उन सवालों का भी जवाब दिया, जिनमें भाजपा नेताओं की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका पर सवाल उठाए जाते हैं। उन्होंने डॉ. राजेंद्र प्रसाद का उदाहरण देते हुए कहा कि वे स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में थे, जेल गए थे और बाद में देश के प्रथम राष्ट्रपति बने। 1950 में संविधान सभा के स्तर पर वंदे मातरम् को दिए गए सम्मान का उल्लेख भी इसी ऐतिहासिक संदर्भ में किया जाना चाहिए।

भाजपा सांसद ने कांग्रेस पर मुस्लिम लीग के साथ उसके पुराने राजनीतिक संबंधों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने 1936-37 के दौर में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच हुए राजनीतिक समझौतों का हवाला देते हुए दावा किया कि वंदे मातरम के केवल शुरुआती दो पद गाए जाने की परंपरा के पीछे मुस्लिम लीग की धार्मिक भावनाओं से जुड़ी आपत्तियां रही होंगी। हालांकि, उन्होंने इस संदर्भ में संभावना के तौर पर अपनी बात रखी और कांग्रेस की वर्तमान राजनीति को उस ऐतिहासिक दौर से जोड़ने की कोशिश की।

प्रसाद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज भी कथित ‘वोट बैंक’ की राजनीति के कारण अपनी ही ऐतिहासिक परंपराओं से समझौता कर रही है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम की रचना या उसके निर्माण में भाजपा की कोई भूमिका नहीं थी, इसलिए इस मुद्दे को भाजपा बनाम कांग्रेस के राजनीतिक विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, यह राष्ट्रीय भावना और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जुड़ा विषय है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने दिमागी नक्सल में किसी का नाम नहीं लिया था, उन्होंने केवल दिमागी नक्सलियों से सावधान रहने की बात कही थी। अमित शाह जी ने संकल्प लिया था कि हम माओवाद को समाप्त करेंगे और वो आज समाप्त हो चुका है। बस्तर, सुकमा, महाराष्ट्र में आज नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो चुका है। प्रधानमंत्री का इशारा उन लोगों की तरफ था, जो लोग माओवाद को बौद्धिक खाद देते हैं, उनके पक्ष में लेख लिखते हैं, वित्तीय सहायता भी देते हैं।

–आईएएनएस

एसएके/पीएम

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IANS Agency

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