Women Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर उथल-पुथल जारी है। केंद्र सरकार ने इस बिल को संसद में पेश करने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। वहीं विपक्ष इसके कुछ प्रावधानों को लेकर विरोध में खड़ा नजर आ रहा है। खासकर परिसीमन और लागू करने की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी दलों की बैठक के बाद सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिला आरक्षण के पक्ष में रही है, लेकिन मौजूदा बिल में पुराने संशोधनों को नजरअंदाज किया गया है। उनका कहना है कि सरकार की कार्यशैली पर भरोसा नहीं किया जा सकता और इसकी नीयत पर भी सवाल उठ रहे हैं।
Women Reservation Bill: बिल के तरीके पर आपत्ति
मोदी सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाकर बेहद त्रुटिपूर्ण और असंवैधानिक परिसीमन की प्रक्रिया को लागू करने वाली है।
आज इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष श्री @kharge के आवास पर महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi और विपक्षी दलों के नेता मौजूद रहे।
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— Congress (@INCIndia) April 15, 2026
खरगे ने स्पष्ट किया कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसे लागू करने के तरीके से असहमति है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल कर रही है। साथ ही परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई और कहा कि इसमें पारदर्शिता नहीं है।
परिसीमन को लेकर बढ़ी चिंता
कांग्रेस का कहना है कि परिसीमन के जरिए सत्ता संतुलन को प्रभावित किया जा सकता है। पार्टी का आरोप है कि पहले असम और जम्मू-कश्मीर में भी परिसीमन के दौरान विपक्ष को नजरअंदाज किया गया था। इसी वजह से अब इस बिल पर भी भरोसा करना मुश्किल हो रहा है।
543 सीटों के आधार पर आरक्षण की मांग
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि महिला आरक्षण मौजूदा लोकसभा की 543 सीटों के आधार पर दिया जाना चाहिए। उनका सुझाव है कि एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हों और इसे 2029 से लागू किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन से जुड़े प्रावधान स्वीकार्य नहीं हैं और इस पर खुलकर बहस होनी चाहिए।
वेणुगोपाल का बयान
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि परिसीमन का कदम देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संघीय ढांचे को प्रभावित कर सकता है। इसलिए कांग्रेस इस प्रस्ताव का विरोध करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि विपक्षी दलों की बैठक में आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।
आम आदमी पार्टी का रुख
आम आदमी पार्टी (आप) ने भी महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष का साथ देने की बात कही है। पार्टी का कहना है कि अगर मौजूदा 543 सीटों में से 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू किया जाता है, तो वे सरकार का समर्थन कर सकते हैं। लेकिन बिना जनगणना के परिसीमन करना राज्यों के साथ अन्याय होगा।
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