Breaking News! जुम्मे पर भोजशाला मामले में इंदोर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, परिसर को बताया मां वाग्देवी का मंदिर

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HC Verdict on Dhar Bhojshala : भोजशाला मामले में इंदोर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला आया है. बता दें परिसर को मां वाग्देवी का मंदिर माना गया है. धार की विवादित भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद मामले में आया है. इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने पांच याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन पर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया है. बता दें इस फैसले से पहले इलाके में शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए धार शहर में फ्लैग मार्च निकाला गया है. कहा कोर्ट ने बता दें कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि भोजशाला का मूल स्वरुप संस्कृत शिक्षा केंद्र…

HC Verdict on Dhar Bhojshala : भोजशाला मामले में इंदोर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला आया है. बता दें परिसर को मां वाग्देवी का मंदिर माना गया है. धार की विवादित भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद मामले में आया है. इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने पांच याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन पर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया है. बता दें इस फैसले से पहले इलाके में शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए धार शहर में फ्लैग मार्च निकाला गया है.

कहा कोर्ट ने

HC Verdict on Dhar Bhojshala
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बता दें कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि भोजशाला का मूल स्वरुप संस्कृत शिक्षा केंद्र का था. अदालत ने ASI सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन पर भरोसा पर भरोसा जताते हुए कहा कि पुरातत्व एक विज्ञान है और कोर्ट वैज्ञानिक निष्कर्षों पर भरोसा कर सकती है. कोर्ट ने कहा कि सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि एतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाली संरचनाओं का संरक्षण करे.

बता दें, अदालत ने साथ में श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं, क़ानून व्यवस्था और संरक्षण सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है. कोर्ट ने सरकार और ASI को भोज परिसर के प्रबंधन और संस्कृत शिक्षा से जुड़े फैसले लेने को कहा है. वहीँ ASI परिसर का प्रशासन और प्रबंध जारी रखेगा.

Madhya Pradesh Bhojshala Case Indore : विवाद है पुराना

HC Verdict on Dhar Bhojshala
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इस मामले में नमाज के लिए धार जिले में ही मुस्लिम पक्ष को अलग से जमीन के लिए सरकार से संपर्क करने की छूट दी गई है.

जानकारी के लिए बता दें, भोजशाला विवाद पुराना है. सालों से हिन्दू पक्ष इसे देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानता है. वहीँ मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहते हैं. कई सालों की व्यवस्था के अनुसार हिन्दुओं को हर मंगलवार को भोजशाला में पूजा करने का अधिकार दिया था, जबकि मुसलामानों को शुक्रवार को नमाज पढने की अनुमति थी.

मुस्लिम पक्ष को सरकार से अलग जमीन के लिए संपर्क की छूट

कोर्ट ने अपने फैसल एमें कहा कि विवादित स्थल पर हिन्दू पोजा की निरंतरता कभी समाप्त नहीं हुई. अदालत ने माना कि एतिहासिक दस्तावेजों और साहित्य से यह स्थापित होता है कि विवादित क्षेत्र का मूल चरित्र भोजशाला के रूप में था, जो परमार वंश के राजा भोज से जुदा संस्कृत शिक्षा केंद्र था.

इस मामले में नमाज के लिए धार जिले में ही मुस्लिम पक्ष को अलग से जमीन के लिए सरकार से संपर्क करने की छूट दी गई है.

कोर्ट ने कहा कि विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर एक संरक्षित स्मारक है जिसे 1904 में संरक्षित स्मारक का दर्जा प्राप्त है. अदालत ने स्पस्ट रूप से कहा कि इस क्षेत्र को धार्मिक चरित्र भोजशाला और देवी वाग्देवी के रूप में स्थापित होता है.

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।