वैसे तो सही बात मायनों में यह बात सभी के लिए लागू होती है कि ट्रैफिक नियम सबके लिए एक जैसे होने चाहिए। फिर चाहे वो अधिकारी हो या फिर नेता। ताजा-ताजा मामला इसी नियम से जुड़ा हुआ है। जी हां हाल ही में उत्तराखंड में उत्तर प्रदेश के एक पुलिस अफसर का चालान कटा है। दरअसल यह अफसर अपनी निजी कार पर फ्लैशर्स और सायरन लगाए चल रहे थे। नियम के अनुसार तो पूरे देश में चाहे राष्ट्रपति ही क्यों ना हो,प्रधानमंत्री,मुख्यमंत्री या अन्य कोई व्यक्ति किसी को भी अपने व्हीकल पर सायरन और फ्लैशर्स लगाने की इज्जात नहीं है।

इस गलती की वजह से रोका
मिली रिपोर्ट के अनुसार जब इस पुलिस अफसर का चालान कटा गया तो वह अपने 4-5 दोस्तों के साथ अपनी कार मारुति सुजुकी डिजायर में थे। वो अपने दोस्तों के साथ उत्तराखंड घूमने आए हुए थे। लेकिन उनकी गलती यह हुई कि उन्होंने अपनी प्राइवेट-रजिस्टर्ड कार पर फ्लैशर्स और साइयरन लगा रखा था।

जब उत्तराखंड ट्रैफिक पुलिस ने उनकी कार को देखा फिर अल्मोड़ा शहर के टैक्सी स्टैंड के पास उन्हें रोक लिया। जैसे ही कार रुकी उसमें से ड्राइवर निकालकर बाहर आया और कहा कि यह बदायूं यूपी के सीनियर इंस्पेक्टर की कार है। वो यहां पर घुमने के लिए आए है। इसके बाद उत्तराखंड ट्रैफिक पुलिस और सीनियर इंस्पेक्टर के बीच काफी देर तक बहस भी हुई इसके बाद सिटी पेट्रोल यूनिट को फौरान बुलाया गया।

खुद को सुरक्षित करने के चक्कर में सीनियर इंस्पेक्टर ने कहा कि वो उत्तर प्रदेश में बिना किसी परेशानी के कार पर फ्लैशर लगाए घूमते हैं। जबकि उत्तराखंड पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी और कहा यह ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन है। इसके बाद यूपी पुलिस के सीनियर इंस्पेक्टर पर सीपीयू ने पूरे 2000 हजार रुपए का जुर्माना ठोका।


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