बता दें, पार्टी के नेता षणमुगम ने मंगलवार की सुबह बयान दिया, ‘हम जनता के जनादेश को स्वीकार करते हैं. यह जनादेश TVK के लिए नहीं, विजय के लिए है. इसलिए हम TVK सरकार को अपना समर्थन देते हैं. अगर हम DMK के साथ गठबंधन करते तो AIADMK का अस्तित्व ही समाप्त हो जाता.’
हालांकि षणमुगम ने यह भी कहा, ‘मेरी AIADMK तोड़ने की कोई मंशा नहीं है. एडप्पादी पलानीसामी ही हमारे नेता हैं.
विधानसभा चुनाव में पार्टी को भारी नुकसान

आपको बता दें, तमिलनाडु के चुनाव इस बार काफी चौंकाने वाले रहे. राज्य की दोनों ट्रेडिशनल पार्टियों DMK और AIDMK को जनता ने नकार दिया और 108 सीटों के साथ राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में नई नवेली TVK राज्य की जिम्मेदारी सौंप दी. बता दें, 2026 के विधानसभा चुनाव में AIADMK केवल 47 सीटें ही जीत पाई. माना जा रहा था कि राज्य में स्टालिन सरकार के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी को वह वैक्यूम कर लेगी मगर हुआ इसके उल्टा, सारा वैक्यूम TVK कर ले गई और AIADMK तीसरी पार्टी बनने पर मजबूर हो गई.
बता दें इस टूट के बाद अब AIDMK में केवल पलानीसामी गुट रह गया है. इसमें 17 नेता हैं. बता दें, इस बयान के बाद यह समझ आ रहा है कि दोनों गुटों में पहली बार मतभेद तब दिखाई दिए, हालांकि यह पहली बार नहीं जब AIDMK में इस तरह की बगावत देखने को मिली हो. इससे पहले राज्य में 5 बार बगावत हो चुकी है.
5 बार पार्टी में बिखराव

- जिसमें MGR की मौत के बाद AIDMK दो हिस्सों में बंट गई थी. एक गुट जयललित के साथ और दूसरा उनकी पहली पत्नी जानकी रामचंद्रन के साथ चला गया था.
- इसके बाद दूसरा उलटफेर तब हुआ जब जयललिता और जानकी दोनों के गुट आपस में मिले और जयललिता ने आखिरकार पार्टी में मजबूती बना ली.
- 2017 में जयललिता के निधन के बाद फिर बड़ा सत्ता संघर्ष चला. जहां पनीरसेलवम और पलानीसामी के बीच खींचतान चली और पार्टी दो धड़ों में बंटी दिखाई दी.
- वहीँ 2018 में टीवी दिनाकरण ने अलग होकर AMMK बनाई, जिससे AIDMK में वोट बैंक में सेंध लगी और पार्टी कमजोर हुई.
- वहीँ अब TVK को समर्थन देने के बाद से पार्टी में फिर टूट हुई है.


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