माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने संशोधित नागरिकता क़ानून (सीएए) को संविधान विरोधी बताते हुए कहा है कि माकपा इस कानून की संवैधानिकता को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी। येचुरी ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हमने इस क़ानून को शीर्ष अदालत में चुनौती देने के लिये याचिका दायर करने की तैयार कर ली है, इसे आज या कल दायर कर दिया जाएगा।’’
उन्होंने कहा कि इस कानून को चुनौती देने की तीन प्रमुख वजह हैं। पहला, यह मूलत: संविधान विरोधी कानून है, दूसरा यह असम समझौते का उल्लंघन करता है और तीसरा, सरकार ने यह कानून देश में धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण करने के लिये पारित किया है।
सीएए के कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद इसे संसद के दोनों सदनों और फिर राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी मिलने के बाद माकपा की याचिका उच्चतम न्यायालय में टिक पाने के सवाल पर येचुरी ने कहा, ‘‘हमारी नजर में यह कानून असंवैधानिक नहीं बल्कि संविधान के विरुद्ध है।
याचिका पर उच्चतम न्यायालय क्या रुख अपनाता है, यह अदालत को ही तय करना है। हमें लगता है कि अदालत द्वारा सीएबी को संविधान के विरुद्ध करार दिया जायेगा।’’ येचुरी ने भाजपा पर इस क़ानून के माध्यम से देश का सामाजिक सौहार्द ख़राब करने का आरोप लगाते हुए कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदर्शनकारियों की वेशभूषा देखकर इनकी पहचान करने का निंदनीय बयान दिया है।
इससे सत्तारूढ़ दल और सरकर की मंशा का साफ़ तौर पर पता चलता है। यह बयान प्रधानमंत्री के पद की गरिमा के विरुद्ध है।” उन्होंने कहा कि असम सहित पूर्वोत्तर राज्यों से लेकर दिल्ली तक एनआरसी और सीएए की वजह से देश में कानून व्यवस्था का संकट पैदा हो गया है।
येचुरी ने कहा, ‘‘असम में माकपा कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया है, पूरे इलाके में सेना का नियंत्रण हो गया है।’’ माकपा महासचिव ने कहा कि सरकार ने देश का ध्यान बेरोजगारी और आर्थिक संकट से हटाने के लिये एनआरसी और सीएए का शगूफा छोड़ा है।
उन्होंने कहा कि वामदलों ने सीएए के विरोध में 19 दिसंबर को पूरे देश में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया है। येचुरी ने कहा कि उन्होंने अन्य विपक्षी दलों से भी इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सोमवार को देश के मौजूदा हालात पर हुयी विपक्षी दलों की बैठक में भी इस विषय पर विचार विमर्श किया गया।


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