प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कोरोना संक्रमण और टीकाकरण की रणनीति को लेकर जिलाधिकारियों संग बैठक की। बैठक में मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सचिव के साथ 10 जिलों के डीएम और राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि बैठक में उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया। हमारा अपमान किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि बैठक में उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया। हमारा अपमान किया गया है। उन्होंने कहा, यदि राज्यों को बोलने की अनुमति नहीं थी तो उन्हें क्यों बुलाया गया। बोलने की अनुमति नहीं दिए जाने को लेकर सभी मुख्यमंत्रियों को विरोध करना चाहिए।
सिर्फ BJP के कुछ CM और PM ने रखी अपनी बात
ममता ने आरोप लगाया कि सिर्फ बीजेपी के कुछ सीएम और पीएम मोदी ने अपनी बात रखी, हमको बोलने नहीं दिया गया। सभी मुख्यमंत्री सिर्फ चुपचाप बैठे रहे, किसी ने कुछ नहीं कहा। हमको वैक्सीन की डिमांड रखनी थी, लेकिन बोलने ही नहीं दिया गया। यह एक कैजुअल मीटिंग थी।
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उन्होंने कहा, बैठक के दौरान कोरोना संकट, ब्लैक फंगस, मेडिसिन या वैक्सीन के बारे में बात नहीं हुई। मैंने सोचा था कि मैं उनसे हमें कोरोना वैक्सीन देने का आग्रह करूंगी। हम तीन करोड़ वैक्सीन की मांग रखने वाले थे, लेकिन कुछ कहने नहीं दिया गया। इस महीने 24 लाख वैक्सीन मिलनी थीं, लेकिन सिर्फ 13 लाख ही मिल पाईं।
गंगा में शव मिले हैं तो UP क्यों नहीं टीम भेजी गई केंद्रीय टीम
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, ‘जब पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस के मामले बढ़े तो केंद्रीय टीम भेज दी गई, लेकिन उत्तर प्रदेश में गंगा में शव मिले हैं तो वहां क्यों नहीं टीम भेजी गई। देश इस वक्त बुरे दौर से गुजर रहा है, लेकिन पीएम कैजुअल अप्रोच अपना रहे हैं।’
फ्लॉप और अपमानजनक रही PM के साथ बैठक
देश में कोरोना संक्रमण से हो रही मौतों को लेकर बैठक में प्रधानमंत्री के दावे पर ममता ने कटाक्ष करते हुए कहा, यदि संक्रमण के मामले कम हो रहे हैं, तो फिर अब भी इतनी मौतें क्यों हो रही है। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री की कोविड बैठक पूरी तरह फ्लॉप और अपमानजनक रही।


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