मेघालय में हुए मुकरोह नरसंहार को लेकर कांग्रेस ने मुख्यमंत्री कोनराड संगमा के इस्तीफे की मांग की है। असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले की सीमा से लगे पश्चिम जयंतिया हिल्स जिले के मुकरोह गांव में 22 नवंबर को असम पुलिस द्वारा मेघालय के पांच लोगों सहित छह लोगों को गोली मार दी गई थी, जब असम के वन रक्षकों ने लकड़ी से लदे एक ट्रक को हिरासत में लिया था।
मेघालय प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष पिनशंगैन सिएम ने कहा, ‘‘हमने सर्वसम्मति से यह मांग करने का संकल्प लिया है कि मुख्यमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद इस्तीफा देकर जिम्मेदारी लें और अन्य लोगों को जो सरकार का नेतृत्व कर सकते हैं और असम के साथ अंतर-राज्य सीमा पर लोगों की सुरक्षा के लिए निर्णय लेने दें।’’
उन्होंने कहा, कि उनके इस्तीफे के बाद एक नयी सरकार का मार्ग भी प्रशस्त करेगा, जो असम की सीमा पर रहने वाले मेघालय के निवासियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। पूर्व कांग्रेस विधायक ने सत्तारूढ़ मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (एमडीए) को असम से निपटने में ‘कमजोर’ बताते हुए कहा, ‘‘अगर हमारे लोग राज्य के भीतर मारे जाते हैं तो सीमा वार्ता का क्या फायदा है? सीमा वार्ता का कोई मतलब नहीं है।’’
गौरतलब है कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद के कई क्षेत्रों को हल करने के लिए सीमा वार्ता चल रही है। सिएम ने असम पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे मुकरोह के ग्रामीण लकड़ी की तस्करी कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘यहां के निवासी दावा करते हैं कि असम पुलिस और वन अधिकारी नियमित रूप से कृषि, व्यापार संबंधी कामकाजों के लिए आवाजाही करने पर उनसे पैसे वसूलते हैं।’’
अध्यक्ष सिएम ने कहा कि जिन लोगों को गोली मारी गयी, वे लोग अवैध लकड़ी की तस्करी में शामिल नहीं थे, क्योंकि वे किसान थे। इसलिए यह कहना गलत है कि वे तस्कर थे, असम पुलिस की केवल लोगों के मन में भ्रम पैदा करने की चाल है। मुकरोह घटना की सीबीआई जांच शुरू करने के केंद्र के फैसले का स्वागत करते हुए सिएम ने कहा कि अगर केंद्रीय एजेंसी द्वारा राज्य में ‘अवैध कोयला परिवहन’ की जांच की जाए, तो उन्हें भी खुशी होगी।


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