चेन्नई : मद्रास उच्च न्यायालय ने पुडुचेरी के एक डॉक्टर को 2016 में एक नाबालिग मरीज का यौन उत्पीड़न करने के मामले में आरोप मुक्त करने से इंकार करने के निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है।
न्यायमूर्ति वी पार्थीबन ने हाल ही में डॉक्टर पी राजेंद्रन की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। इस डॉक्टर ने पुडुचेरी की विशेष अदालत द्वारा पोक्सो अधिनियम के तहत सुनाए गए फैसले को चुनौती दी थी।
निचली अदालत के आदेश की पुष्टि करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि अदालत का यह विचार है कि मेडिकल जांच के दौरान याचिकाकर्ता के आचरण के बारे में किसी निर्णय पर पहुंचने के लिये इसे निचली अदालत में ही साबित करना होगा। दरअसल नौ जुलाई, 2016 को 13 साल की एक लड़की पेट में दर्द की शिकायत के साथ अपने मामा और घरेलू सहायिका के साथ राजेंद्रन द्वारा संचालित अस्पताल गई।
इसके बाद डॉक्टर ने स्कैन कराने के लिये कहा। डॉक्टर पर यह आरोप है कि उसने लड़की के पेट दर्द का इलाज करने के बदले अपने रूम में परीक्षण बेड पर लड़की को लेटने के लिये कहा और उसका टॉप हटा दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार याचिकाकर्ता ने लड़की के साथ अभद्र व्यवहार और यौन उत्पीड़न किया जो पोक्सो कानून की धारा 9(ई) में परिभाषित अपराध के दायरे में आता है।


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