EC safety Preparation for Bengal Election : इलेक्शन कमीशन ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा फैसला लिया है। करीब 35 साल बाद राज्य में चुनाव सिर्फ 2 चरणों में कराने की तैयारी की गई है। इससे पहले 2021 में चुनाव 8 चरणों में संपन्न हुआ था। ऐसा चुनाव के दौरान राज्य में भारी अव्यवस्था के चलते हो रहा था।
EC safety Preparation for Bengal Election: सुरक्षा व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव

बता दें बंगाल में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को 2 चरणों में चुनाव होने हैं। बता दें बंगाल ऐसा राज्य है जहां चुनाव के समय सुरक्षा हाई मोड पर ऐक्टवेट कर दी जाती है, ऐसा इसलिए क्योंकि राज्य में चुनावी हिंसा की घटनाएं घटती रहती हैं, और ऐसा हाल फिलहाल नहीं बल्कि दशकों से होता आ रहा है।
इसी को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को भी पूरी तरह से नए सिरे से तैयार किया गया है। इस बार बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की हिंसा या गड़बड़ी को रोका जा सके।
500 से ज्यादा पैरामिलिट्री कंपनियां तैनात
सूत्रों के मुताबिक, इस बार चुनाव के दौरान 500 से अधिक अर्धसैनिक बलों की कंपनियां तैनात की जा रही हैं, जिनमें से लगभग 480 कंपनियां पहले ही राज्य में पहुंच चुकी हैं। शुरुआती चरण में 240 कंपनियों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है। जानकारी के अनुसार, एक कंपनी में करीब 150 जवान होते हैं, जिनमें अधिकारी से लेकर सिपाही तक शामिल रहते हैं।
जानिए किन किन बलों से लैस होगी राज्य की सुरक्षा –
- बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF)
- सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF)
- सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF)
- इंडो-तिबतन बॉर्डर पुलिस (ITBP)
- सशस्त्र सीमा बल (SSB)
- असम राइफल
बता दें, इसके अलावा इलेक्शन कमीशन ने जरूरत पड़ने पर राज्य पुलिस की मदद लेने की बात कही है। जानिए किस बल की कितनी कंपनियां –
- CISF – 37 कंपनियां
- BSF – 160 कंपनियां
- ITBP – 47 कंपनियां
- SSB – 46 कंपनियां
- CRPF – 230 कंपनियां
West Bengal Elections 2026: हिंसा रोकने पर खास फोकस

पिछले चुनावों के अनुभव को देखते हुए इस बार सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। पश्चिम बंगाल में चुनावों के दौरान हिंसा की घटनाएं अक्सर सामने आती रही हैं। 2023 के पंचायत चुनाव के दौरान भी बमबाजी, आगजनी और झड़पों की कई घटनाएं हुई थीं, जिनमें कई लोगों की जान गई थी और कई घायल हुए थे।
चुनाव आयोग का मुख्य उद्देश्य इस बार शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना है। इसके लिए सुरक्षा बलों की रिकॉर्ड तैनाती और सीमित चरणों में चुनाव कराने की रणनीति अपनाई गई है।
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