नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। भाजपा ने मंगलवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए चर्चित ‘कैश फॉर वोट’ कांड को फिर से उठाया। पार्टी ने यह हमला विकिलीक्स खुलासों की 15वीं वर्षगांठ के मौके पर किया और आरोप लगाया कि उस समय केंद्र की कांग्रेस-नीत सरकार ने विश्वास मत जीतने के लिए ‘लोकतंत्र को बेच दिया था।’
भाजपा ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर एक पोस्ट कर 17 मार्च 2011 की घटनाओं को याद किया। पार्टी के अनुसार, उस दिन सामने आए लीक डिप्लोमैटिक केबल्स ने भारतीय राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया था।
पोस्ट में कहा गया कि इन खुलासों में आरोप लगाया गया था कि 2008 में भारत की संसद में हुए महत्वपूर्ण विश्वास मत के दौरान सत्तारूढ़ कांग्रेस नेतृत्व के सहयोगियों ने सांसदों का समर्थन हासिल करने के लिए नकदी से भरे बक्से दिखाए थे, ताकि मनमोहन सिंह सरकार को बचाया जा सके। यह विश्वास मत विवादित भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के बाद सरकार की वैधता को परखने के लिए लाया गया था।
यह मामला पहली बार 2008 में तब सुर्खियों में आया था, जब भाजपा के तीन सांसद (अशोक अर्गल, फग्गन सिंह कुलस्ते और महाबीर सिंह भगोरा) ने लोकसभा में नोटों की गड्डियां लहराकर सनसनी फैला दी थी। इन सांसदों ने आरोप लगाया था कि उन्हें वोटिंग से दूर रहने के लिए एक-एक करोड़ रुपए की पेशकश की गई थी।
भाजपा ने अपने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा कि यह वोट सरकार की वैधता तय करने के लिए था, लेकिन यह घटना ‘कैश फॉर वोट’ घोटाले के रूप में बदनाम हो गई। पार्टी ने आरोप लगाया कि उस समय संसद की पवित्रता पर सवाल खड़े हुए और यह धारणा बनी कि पैसे के जरिए जनप्रतिनिधियों को प्रभावित किया गया।
भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जो पार्टी लोकतंत्र की मजबूती की बात करती है, उसी के दौर में संसद के भीतर नोटों की गड्डियां लहराने की तस्वीरें आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं।
भाजपा ने इसे भारत की राजनीति का ‘काला अध्याय’ बताते हुए सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस ने लोकतंत्र को बेच दिया था?
–आईएएनएस
वीकेयू/एबीएम
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