झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पानी के महत्व का उल्लेख करते हुये आज कहा कि जल का संचयन बेहद जरूरी है। श्री दास ने यहां जलशक्ति अभियान के तहत टीसीबी योजना का निर्माण एवं श्रमदान कार्यक्रम को संबोधित करते हुये कहा कि पानी जीवन के लिए जरूरी है। इसकी जरूरत आज सभी कार्य के लिए है।
सभी को पानी चाहिये लेकिन इसके संचयन के लिए बहुत कम लोग पहल करते हैं। इसका प्रबंधन नहीं होता है, जिससे बरसात का जल व्यर्थ बह जाता है। जल के संचयन की दिशा में सरकार ने पहल करते हुए राज्य में जिला और पंचायत स्तर पर श्रमदान कार्यक्रम का आयोजन कर जल संचयन कार्यक्रम का शुभारंभ कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्मी में गांव और शहर में पानी की समस्या से लोग जूझते हैं। यदि बरसात के पानी का संचयन कर लिया जाये तो भूगर्भ जल स्तर में वृद्धि होगी। ऐसा करने से धीरे धीरे जल संकट से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्राम विकास समिति को पांच लाख रुपये दे रही है। ग्रामीण योजना बनाकर वर्षा जल को रोकने के लिए निर्माण कार्य कर सकते हैं। इस कार्य में किसी अधिकारी का हस्तक्षेप नहीं होगा। इसमें आपका गांव आपकी योजना की तर्ज पर कार्य होगा।
दास ने कहा कि गांव में खेती की जमीन पर मेढ़ की चौड़ई अधिक देखी जाती। इस पर काष्ठ पेड़ लगाकर आमदनी का जरिया बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जन वन योजना के माध्यम से सरकार इस कार्य के लिए 80 प्रतिशत अनुदान प्रदान कर रही है। लोगों को इस योजना का लाभ लेना चाहिए।
इस मौके पर मुख्य सचिव डी। के। तिवारी ने कहा कि राज्य में होने वाली बारिश का मात्र छह प्रतिशत जल का संचयन हो पाता है जबकि 94 प्रतिशत जल बह कर कहीं और चला जाता है।
इस बात की गंभीरता पर सभी को विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सभी लोग छोटे कार्य से पहल करें तो जल संचयन कर जल की जरूरत को पूरा किया जा सकता है।
कार्यक्रम में विधायक जीतू चरण राम, अपर मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, पुलिस महानिदेशक कमल नयन चौबे, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ। सुनील कुमार वर्णवाल, प्रधान सचिव ग्रामीण विकास विभाग अविनाश कुमार, प्रधान सचिव राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के। के। सोन, रांची के उपायुक्त राय महिमापत रे, वरीय पुलिस अधीक्षक अनीश गुप्ता और बड़ संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।


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