कृष्णा नदी के जलग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश के बाद उत्तर कर्नाटक के कई क्षेत्रों में फिर से सैलाब आने का खतरा है। करीब एक महीना पहले ही क्षेत्र में ‘अभूतपूर्व बाढ़’ आई थी।
कृष्णा और उसकी सहायक नदियों– मालप्रभा, घाटप्रभा, वेदगंगा, दूधगंगा और हिरण्यकेशी नदी– बेलगावी, बगलकोट, यादगिर और गडाग जिलों में तबाही मचाने के बाद फिर से उफान पर हैं।
कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र (केएसएनडीएमसी) के निदेशक जी एस श्रीनिवास रेड्डी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि पिछले तीन दिनों से हम नारायणपुर (बांध) से दो लाख से ज्यादा क्यूसेक पानी छोड़ चुके हैं। इससे कुछ पुल और बांध पानी में डूब गए हैं और संचार बाधित हुआ है।
उन्होंने कहा कि इस बार की स्थिति भी उतनी ही गंभीर हो सकती है जितनी एक महीने पहले आई बाढ़ के दौरान थी, जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी और मवेशियों की जान गई थी। इसके अलावा बुनियादी ढांचे और फसलों को भी नुकसान हुआ था।
केएसएनडीएमसी बांध में कृष्णा नदी के बढ़ते पानी की निगरानी कर रहा है। पिछले महीने आई बाढ़ से 22 जिलों की 103 तालुका प्रभावित हुई थीं।


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