ऋषिकेश : वृक्ष मानव विश्वेश्वर दत्त सकलानी को राजकीय सम्मान के साथ ऋषिकेश के श्मशान घाट में मुखाग्नि दी गयी। चंबा पुलिस लाइन शायरी सलामी गारद की टुकड़ी ने शस्त्र झुका कर उनको श्रद्धांजलि अर्पित की। बता दें कि वृक्ष मानव विश्वेश्वर दत्त सकलानी ने शुक्रवार को अंतिम सांस ली थी। 1986 में राजीव गांधी ने इन्हें वृक्ष मित्र की संज्ञा दी थी।
वृक्ष मानव विश्वेश्वर दत्त सकलानी ने अपने पूरे जीवन काल में 50 लाख से अधिक पौधे लगाए थे। उनके बड़े बेटे विवेक सकलानी ने उन्हें मुखाग्नि दी। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, पुलिस क्षेत्राधिकारी नरेंद्र नगर जेपी जुयाल, थानाध्यक्ष मुनि की रेती आरके सकलानी सहित उनके गांव से आए विभिन्न लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
सकलानी ने स्वतंत्रता की लड़ाई में भी बढ़-चढ़कर योगदान दिया। देश की आजादी की खातिर उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। उनकी कड़ी मेहनत के बाद सकलाना घाटी की तस्वीर बदल गई। दरअसल, छह-सात दशक पूर्व तक यह पूरा इलाका वृक्ष विहीन था। धीरे-धीरे उन्होंने बांज, बुरांश, सेमल, भीमल और देवदार के पौधे लगाना शुरू किया।
वृक्ष मित्र पुरस्कार से भी सम्मानित किया था
विशेश्वर दत्त सकलानी को 19 नवंबर 1986 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इंदिरा प्रियदर्शनी वृक्ष मित्र पुरस्कार से भी सम्मानित किया था। वृक्षमानव सकलानी का सपना था कि प्रत्येक आदमी पेड़ों को अपने जीवन के तुल्य माने और उनकी रक्षा करे। उनका संदेश था कि जीवन के तीन महत्वपूर्ण मौकों जन्म, विवाह और मृत्यु पर एक पेड़ जरूर लगाएं। शुक्रवार सुबह विशेश्वर दत्त सकलानी ने अपने घर में अंतिम सांस ली। उनके अचानक से चले जाने पर क्षेत्र के प्रकृति प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई।
सीएम ने जताया दुःख
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पर्यावरणविद् विश्वेश्वर दत्त सकलानी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और दुख की इस घड़ी में उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है। वृक्ष मानव के नाम से प्रसिद्ध टिहरी में जन्मे सकलानी अनन्य प्रकृति प्रेमी, वृक्ष मित्र और पर्यावरण संरक्षक थे। वो आजीवन पर्यावरण रक्षा के लिए प्रयासरत रहे।


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