मध्य प्रदेश में गोरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर आरोपी को छह माह से लेकर तीन साल तक की सजा हो सकती है। राज्य सरकार इसको लेकर आगामी विधानसभा सत्र में मध्य प्रदेश गोवंश वध प्रतिषेध अधिनियम-2004 में संशोधन करने वाली है।
राज्य के कानून मंत्री पी.सी. शर्मा ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए गुरुवार को कहा, “कमलनाथ सरकार का लक्ष्य गोरक्षा है। मगर दूसरे वर्ग ऐसे हैं, जो न तो गोरक्षा करते हैं और न ही गोसेवा करते हैं, मगर गोरक्षा के नाम पर कानून को अपने हाथ में ले लेते हैं।” उन्होंने कहा, “ऐसी संस्थाओं और लोगों पर अंकुश लगे, इसके लिए सरकार प्रयासरत है।”
उन्होंने आगे कहा कि गोरक्षा के नाम पर कानून को हाथ में लेने वालों से आम आदमी को परेशानी न हो, स्थितियां नियंत्रण में हो इसके लिए कानून में संशोधन करने को लेकर बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी मिल गई है। इसे विधानसभा के आगामी सत्र में पेश किया जाएगा।
इस संशोधन प्रस्ताव के विधानसभा में पारित होकर कानून बनने के बाद यदि कोई व्यक्ति गोरक्षा के नाम पर हिसा करेगा तो उसे छह महीने से लेकर तीन साल की सजा और 25 हजार रूपये से लेकर 50 हजार रूपये तक का जुर्माना देना पड़ेगा। गौरतलब है कि राज्य में गौवंश के मामले में वाहन चालक, परिचालक सहित अन्य लोगों की पिटाई के कई मामले सामने आ चुके हैं। सरकार इस नए प्रावधान के होने पर हिंसक घटनाओं पर रोक की संभावना जता रही है। इसके अलावा कानून के चलते पशुओं की प्रदेश के भीतर और बाहर खरीदी-बिक्री में इसके बाद से कोई समस्या नहीं आएगी।


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