पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ‘नागरिकों को डेटा प्रदान करने में पारदर्शिता की कमी’ को लेकर सोमवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट किया, आज ‘इंटरनेशनल डे फॉर यूनिवर्सल एक्सेस टू इनफॉर्मेशन’ (सूचना के लिए सार्वभौमिक पहुंच के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस) है। यह हैरतअंगेज कर देने वाला है कि हालिया संसद सत्र के दौरान भारत सरकार कैसे उजागर हुई।

ममता ने कहा कि लॉकडाउन के तुरंत बाद अपने गांवों में लौटने के दौरान मरने वाले प्रवासियों की संख्या या कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई के दौरान मरने वाले डॉक्टरों की संख्या के बारे में संसद में पूछे जाने पर केंद्र सरकार का रुख था की ‘कोई डेटा उपलब्ध नहीं’ है। उन्होंने कहा, प्रत्येक नागरिक को सूचना का अधिकार है। सरकार लोगों के प्रति जवाबदेह है।मुख्यमंत्री ने पिछले सप्ताह राज्यसभा के आठ सदस्यों के निलंबन के बाद केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया था और घोषणा की थी कि उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस कृषि विधेयकों पर ‘अलोकतांत्रिक’ कदम के विरोध में सड़कों पर उतरेगी।
बता दें की केंद्र सरकार ने कहा था कि किसानों की आत्महत्या का विवरण कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने उपलब्ध नहीं कराया है। और इसलिए, कृषि क्षेत्र में आत्महत्या के कारणों संबंधी राष्ट्रीय आंकड़ा ‘अपुष्ट’ है और इसे प्रकाशित नहीं किया जा सकता है।


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