MP Fauzia Khan on Dhurandhar 2: शरद पवार की पार्टी की सांसद फौजिया खान ने फिल्म ‘धुरंधर 2’ को लेकर विवाद खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि यह फिल्म भारतीय मुसलमानों के खिलाफ गलत संदेश फैलाती है, जबकि मेकर्स के अनुसार, फिल्म की कहानी पाकिस्तान में आतंकवाद और ISI की गतिविधियों को उजागर करने पर आधारित है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस फिल्म को लेकर इतना विवाद क्यों हो रहा है? क्या सांसद फौजिया खान आतंकियों की हिमायती बन रहीं हैं?
MP Fauzia Khan on Dhurandhar 2: फिल्म की कहानी की शुरुआत

Sharad Pawar’s party MP Fauzia Khan is calling Dhurandar 2 propaganda against Indian Muslims.
But the film exposes Pakistan’s terrorism & ISI.
Why is Fauzia equating Indian Muslims with terrorists? pic.twitter.com/WhomYSpBax
— BALA (@erbmjha) March 19, 2026
फिल्म का दूसरा पार्ट कुल छह चैप्टर में बंटा हुआ है। इसकी शुरुआत एक फ्लैशबैक से होती है, जिसमें जसकीरत सिंह रांगी (रणवीर सिंह) की पिछली जिंदगी को दिखाया जाता है। वह एक फौजी परिवार से ताल्लुक रखता है। उसके पिता सेना में थे और जसकीरत खुद भी देश सेवा के लिए फौज में भर्ती होने की तैयारी कर रहा था। लेकिन उसकी जिंदगी में अचानक एक ऐसा मोड़ आता है, जो सब कुछ बदल देता है। परिवार के साथ हुए अन्याय और खतरे के कारण उसे हथियार उठाने पड़ते हैं।
MP Fauzia Khan Statement: बदले की आग और जेल की सजा

अपने परिवार के साथ हुए अन्याय का बदला लेने के लिए जसकीरत एक विधायक (एमएलए) के घर में घुसकर हमला कर देता है। इस घटना में खून-खराबा होता है, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है। अदालत उसे उम्रकैद की सजा सुनाती है। जेल में बिताए गए समय के दौरान उसकी जिंदगी फिर एक नया मोड़ लेती है, जब इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के डायरेक्टर अजय सान्याल (आर माधवन) उससे मिलते हैं।
देश के लिए मिशन की शुरुआत
अजय सान्याल, जसकीरत को देश के लिए काम करने का एक मौका देते हैं। वह उसे एक खास मिशन पर भेजते हैं, जहां उसे अपनी असली पहचान छुपाकर पाकिस्तान में रहना होता है। वहां वह “हमजा अली मजारी” के नाम से एक अंडरकवर एजेंट बन जाता है। फिल्म के पहले पार्ट में उसके इस मिशन की शुरुआती कहानी दिखाई गई थी, जहां उसने पाकिस्तान में अपनी पहचान बनाकर दुश्मनों के बीच जगह बनाई।
MP Fauzia Khan Statement: नई कहानी, रहमान की मौत के बाद
दूसरे पार्ट की कहानी रहमान डकैत (अक्षय खन्ना) की मौत के बाद शुरू होती है। रहमान की मौत के बाद सत्ता का संतुलन बिगड़ जाता है। ऐसे में हमजा, रहमान के छोटे भाई उजैर (दानिश पंडोर) को ल्यारी का नया सरगना बनाता है, ताकि वह अपने मिशन को आगे बढ़ा सके।
बड़े साहब का रहस्य
आगे कहानी में मेजर इकबाल (अर्जुन रामपाल) हमजा की मुलाकात अपने एक रहस्यमयी “बड़े साहब” से करवाते हैं। यहीं से फिल्म में सस्पेंस और गहराता है। सबसे बड़ा सवाल यही बनता है कि ये बड़े साहब कौन हैं? क्या हमजा का असली मकसद इन्हें खत्म करना है? और क्या वह अपने मिशन में सफल हो पाएगा?
देखने लायक सस्पेंस और एक्शन
फिल्म में देशभक्ति, बदले की भावना, और अंडरकवर मिशन का जबरदस्त मिश्रण देखने को मिलता है। कहानी में कई ट्विस्ट और टर्न हैं, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखते हैं। इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी, क्योंकि यही इसकी असली रोमांचकता है।
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