उत्तरकाशी : ग्रामीणों के कड़े विरोध के बीच प्रशासन ने जिले में कंसेण गांव के निकट जल विद्युत निगम की भूमि में आखिरकार रामलीला मैदान में एकत्र किया गया कूड़ा डाल दिया है। मंगलवार तड़के पुलिस बल के बीच अधिकारियों ने करीब 18 से 20 ट्रक कूड़ा उड़ेला। इस बीच कूड़ा निस्तारण केंद्र का विरोध कर रहे दो दर्जन से अधिक ग्रामीणों को हिरासत में भी लिया गया।
वहीं प्रशासन ने इसे अस्थायी व्यवस्था बताते हुए कूड़ा निस्तारण के लिए उपयुक्त भूमि मिलते ही कूड़ा हटाने का भरोसा दिया है। इधर, रामलीला मैदान को माघ मेले के लिए खाली कर दिया गया है। करीब दो माह तक चली खींचातानी के बाद सोमवार को प्रशासन ने जल विद्युत निगम की भूमि पर अस्थायी रूप से कूड़ा डालने का निर्णय लिया। सोमवार देर रात को रामलीला मैदान में जमा कूड़े को ट्रकों में लोड कर दिया गया।
वहीं ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया, जिसके बाद मंगलवार सुबह करीब छह बजे कूड़े से लदे ट्रकों को कूड़ा निस्तारण केंद्र पहुंचाकर उड़ेला गया। इस बीच मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर कूड़ा डालने का विरोध किया, लेकिन विरोध बढ़ने से पहले ही पुलिस ने दो दर्जन से अधिक ग्रामीणों को हिरासत में ले लिया, जिन्हें कुछ समय बाद रिहा कर दिया गया।
कूड़े का स्थायी समाधान ढूंढना है चुनौती : रामलीला मैदान में जमा कूड़े का अस्थायी समाधान करने के बावजूद जिला प्रशासन व पालिका की चुनौती कम नहीं हुई है। कंसेण गांव के निकट अस्थायी रूप से डाले जा रहे कूड़े का निस्तारण करना व पर्यावरण मानकों के तहत स्थायी डंपिंग जोन का निर्माण करना अभी भी बड़ी समस्या है।
वहीं, प्रशासन की कार्रवाई से आक्रोशित कंसेण गांव के ग्रामीणों ने हाईकोर्ट व एनजीटी में अपील की है। पालिकाध्यक्ष रमेश सेमवाल का कहना कि पर्यावरण कानूनों के कारण कुछ परेशानियां होने के बावजूद प्रशासन व पालिका ने कूड़ा निस्तारण का आदर्श मॉडल तैयार किया है, लेकिन जनता के सहयोग के बिना इसे सफलता पूर्वक लागू कर पाना मुमकिन नहीं है।


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