नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी पर देश भर में जारी बहस के बीच महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मुसलमान घुसपैठियों के खिलाफ एक बार फिर से बुलंद आवाज उठाई है। शिवसेना ने मुखपत्र सामना में लिखा कि देश में घुसे पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मुसलमानों को बाहर निकलाना चाहिए।
शिवसेना ने राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना पर निशाना साधते हुए लिखा पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मुसलमानों को बाहर निकालने के लिए किसी राजनीतिक दल को अपना झंडा बदलना पड़े, ये मजेदार है। दूसरी बात ये है कि इसके लिए एक नहीं, दो झंडों की योजना बनाना ये दुविधा या फिसलती गाड़ी के लक्षण हैं।
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राज ठाकरे और उनकी 15 साल पुरानी पार्टी ने मराठी के मुद्दे पर पार्टी की स्थापना की। लेकिन अब उनकी पार्टी हिंदुत्ववाद की ओर जाती दिख रही है। इसे रास्ता बदलना कहना ही ठीक होगा। शिवसेना ने मराठी के मुद्दे पर बहुत काम किया हुआ है। इसलिए मराठियों के बीच जाने के बावजूद उनके हाथ कुछ नहीं लगा और लगने के आसार भी नहीं हैं।
शिवसेना के मुताबिक उसने हिंदुत्व का भगवा रंग कभी नहीं छोड़ा। इसलिए दो झंडे बनाने के बावजूद राज के झंडे को वैचारिक समर्थन मिल पाएगा, इसकी संभावना नहीं दिख रही। संपादकीय में लिखा है, ‘ऐसा कहा जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी को जैसी चाहिए, वैसी ही ‘हिंदू बांधव, भगिनी, मातांनो…’ आवाज राज ठाकरे दे रहे हैं। यहां भी इनके हाथ कुछ लग पाएगा, इसकी उम्मीद कम ही है। शिवसेना ने प्रखर हिंदुत्व के मुद्दे पर देशभर में जागरूकता के साथ बड़ा कार्य किया है।


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