Siddaramaiah Delhi Meeting: कर्नाटक की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार आज दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के साथ अहम बैठक करने वाले हैं। इस बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से साफ किया गया है कि फिलहाल मुख्यमंत्री बदलने या (Karnataka New CM) बड़े कैबिनेट फेरबदल जैसे मुद्दे आधिकारिक एजेंडे में शामिल नहीं हैं।
बताया जा रहा है कि इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं। माना जा रहा है कि बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों की तैयारी को लेकर रणनीति बनाना है।
Siddaramaiah Delhi Meeting: राज्यसभा चुनाव पर कांग्रेस की खास नजर

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व इस समय कर्नाटक की राज्यसभा सीटों को लेकर काफी गंभीर है। पार्टी को भरोसा है कि मौजूदा राजनीतिक स्थिति में वह तीन सीटों पर जीत हासिल कर सकती है, लेकिन इसके लिए पार्टी विधायकों को एकजुट रखना बेहद जरूरी माना जा रहा है। यही वजह है कि कांग्रेस फिलहाल ऐसे किसी फैसले से बचना चाहती है जिससे पार्टी के अंदर असंतोष बढ़े। यदि इस समय नेतृत्व परिवर्तन या मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव किए जाते हैं तो उसका असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।
इसके अलावा विधान परिषद चुनावों को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। पार्टी उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति पर मंथन कर सकती है। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि सरकार और संगठन दोनों के बीच तालमेल बना रहे ताकि चुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।
सिद्धारमैया बोले- बैठक का एजेंडा नहीं बताया गया

दिल्ली रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि उन्हें पार्टी हाईकमान ने बैठक के लिए बुलाया है, लेकिन एजेंडा क्या है इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने फोन कर बैठक की सूचना दी थी। सिद्धारमैया के इस बयान के बाद राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं। पिछले कुछ महीनों से राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा लगातार होती रही है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते रहे हैं।
डीके शिवकुमार की दिल्ली यात्रा पर भी नजर
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी दिल्ली पहुंच चुके हैं। उन्होंने अपनी यात्रा को “विशेष परिस्थितियों” से जुड़ा बताया। शिवकुमार ने कहा कि यदि पार्टी नेतृत्व बुलाता है तो उनका दिल्ली जाना स्वाभाविक है। हालांकि उन्होंने मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर खुलकर कुछ नहीं कहा। उन्होंने साफ किया कि यह पूरी तरह पार्टी हाईकमान का फैसला है और वह नेतृत्व के हर निर्णय का सम्मान करेंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिल्ली में उनकी कुछ केंद्रीय नेताओं से अलग से भी मुलाकात हो सकती है। इसी कारण उनकी यात्रा को केवल सामान्य राजनीतिक बैठक नहीं माना जा रहा।
सत्ता संतुलन को लेकर बढ़ी अंदरूनी खींचतान
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने हाल ही में अपने तीन साल पूरे किए हैं। इसके बाद सत्ता साझेदारी को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। डीके शिवकुमार के समर्थकों का दावा है कि 2023 विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी में एक समझौता हुआ था। उनका कहना है कि अब उस समझौते को लागू करने का समय आ गया है। इसी वजह से शिवकुमार समर्थक लगातार नेतृत्व परिवर्तन की मांग को हवा दे रहे हैं।
दूसरी ओर सिद्धारमैया कई बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि वह पांच साल तक मुख्यमंत्री बने रहना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान का ही होगा और वह उसके फैसले का पालन करेंगे।
Congress Internal Friction: दिल्ली पहुंचे सिद्धारमैया समर्थक नेता
दिल्ली में होने वाली बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि सिद्धारमैया के करीबी कई नेता और मंत्री भी राजधानी पहुंच चुके हैं। इनमें सतीश जारकीहोली, जी. परमेश्वर और एच. सी. महादेवप्पा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन नेताओं की मौजूदगी से यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी के भीतर अलग-अलग गुट अपने राजनीतिक समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से इसे सामान्य संगठनात्मक बैठक बताया जा रहा है।
कांग्रेस के कुछ नेताओं ने यह मांग भी उठाई है कि यदि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन होता है तो मुख्यमंत्री पद किसी दलित नेता को दिया जाना चाहिए। इस चर्चा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का नाम भी सामने आया है। इसके अलावा गृह मंत्री जी. परमेश्वर को भी संभावित चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से इस विषय पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस सामाजिक संतुलन और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए भविष्य की रणनीति तैयार कर सकती है।
Karnataka Cabinet Expansion:कैबिनेट फेरबदल की मांग लगातार बढ़ रही
राज्य के कई विधायक लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की मांग कर रहे हैं। कई विधायकों का मानना है कि सरकार में नए चेहरों को मौका मिलना चाहिए। बताया जा रहा है कि कुछ विधायक पहले भी दिल्ली जाकर पार्टी नेतृत्व से मुलाकात कर चुके हैं। आने वाले दिनों में और भी विधायक राजधानी पहुंच सकते हैं ताकि मंत्रिमंडल में अपनी दावेदारी मजबूत कर सकें। राजनीतिक तौर पर इसे भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ और सत्ता संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है।
दिल्ली बैठक पर टिकी सबकी नजर
हालांकि कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल किसी बड़े बदलाव से इनकार कर रहा है, लेकिन दिल्ली में होने वाली यह बैठक कर्नाटक की राजनीति के लिए काफी अहम मानी जा रही है। राज्यसभा चुनाव, सत्ता संतुलन, गुटबाजी, नेतृत्व परिवर्तन और कैबिनेट फेरबदल जैसे मुद्दों के बीच कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट रखना है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद पार्टी क्या संदेश देती है और कर्नाटक की राजनीति आने वाले दिनों में किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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