नितिन गडकरी: ‘फास्ट डिसीजन, फास्ट एक्शन’, भारत की ‘रोड्स एंड हाईवे क्रांति’ के सूत्रधार

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नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। 27 मई 1957 को महाराष्ट्र के नागपुर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मा एक बालक भारत की ‘रोड्स एंड हाईवे क्रांति’ का चेहरा बनेगा, यह शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। आज जब देश के कोने-कोने को जोड़ती एक्सप्रेसवे की चमकदार सड़कें विकास की नई कहानी लिख रही हैं, तो उन सड़कों के पीछे सबसे प्रमुख नाम है केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का। भारतीय राजनीति में अक्सर भाषण और वादों की चर्चा होती है लेकिन नितिन गडकरी ने अपनी पहचान काम, गति और परिणाम से बनाई। राजनीति में पद व अवसर बदलते रहते…

नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। 27 मई 1957 को महाराष्ट्र के नागपुर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मा एक बालक भारत की ‘रोड्स एंड हाईवे क्रांति’ का चेहरा बनेगा, यह शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। आज जब देश के कोने-कोने को जोड़ती एक्सप्रेसवे की चमकदार सड़कें विकास की नई कहानी लिख रही हैं, तो उन सड़कों के पीछे सबसे प्रमुख नाम है केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का।

भारतीय राजनीति में अक्सर भाषण और वादों की चर्चा होती है लेकिन नितिन गडकरी ने अपनी पहचान काम, गति और परिणाम से बनाई। राजनीति में पद व अवसर बदलते रहते हैं लेकिन कुछ लोग अपने काम से स्थायी पहचान बना लेते हैं। उन्हें सिर्फ एक राजनेता नहीं बल्कि इन्फ्रास्ट्रक्चर विजनरी के रुप में जाना जाता है। यही वजह है कि गडकरी को ‘हाईवे मैन ऑफ इंडिया’ और ‘एक्सप्रेसवे मैन ऑफ इंडिया’ जैसे नामों से जाना जाता है।

नितिन गडकरी की पहचान भी ऐसी ही है। उन्हें आने वाले वर्षों में सबसे ज्यादा इस बात के लिए याद किया जाएगा कि उन्होंने भारत विकास की रफ्तार दी। एक ऐसा भारत, जहां हाईवे केवल दूरी कम नहीं करते बल्कि अर्थव्यवस्था, उद्योग, गांव और शहरों को जोड़ते हैं। यही वजह है कि नितिन गडकरी को भारत की ‘रोड्स एंड हाईवे क्रांति’ का सबसे बड़ा सूत्रधार कहा जाता है।

नागपुर से गडकरी के व्यक्तित्व को दिशा मिली। उनकी मां ने उनमें समाज सेवा की भावना जगाई और आरएसएस ने राष्ट्र निर्माण का संस्कार दिया। युवावस्था में ही उन्होंने यह समझ लिया था कि राजनीति केवल सत्ता का माध्यम नहीं बल्कि सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का सबसे बड़ा हथियार हो सकती है। सन 1975 में जब देश में आपातकाल लगाया, तभी उनके जीवन में एक निर्णायक मोड़ आया।

कानून की पढ़ाई पूरी करने के बावजूद उन्होंने वकालत के बजाय जनसेवा का रास्ता चुना। एमकॉम, एलएलबी और डिप्लोमा इन बिजनेस मैनेजमेंट की शिक्षा लेने वाले गडकरी ने छात्र राजनीति में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरुआत की और बाद में भाजपा युवा मोर्चा से जुड़ गए। पार्टी में संगठन से लेकर सरकार तक नितिन गडकरी ने हर भूमिका में अपनी अलग छाप छोड़ी। वे महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष बने और बाद में पार्टी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे।

1995 से 1999 के बीच महाराष्ट्र के लोक निर्माण विभाग के मंत्री रहते हुए उन्होंने वह कर दिखाया जिसने देश की इंफ्रास्ट्रक्चर राजनीति की दिशा बदल दी। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना सिर्फ सड़क नहीं थी बल्कि आधुनिक भारत की नई रफ्तार का प्रतीक थी। यही परियोजना आगे चलकर उनके राजनीतिक और प्रशासनिक विजन की पहचान बनी। मुंबई में फ्लाईओवर निर्माण की तेज रफ्तार ने उन्हें ‘फ्लाईओवर मैन’ का नाम दिलाया। राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान तब बनी जब केंद्र की मोदी सरकार में वह मंत्री बने और फिर भारत के सड़क नेटवर्क को अभूतपूर्व विस्तार दिया।

उनके कार्यकाल में भारत का नेशनल हाईवे नेटवर्क लगभग 60 प्रतिशत तक बढ़ा। देश में एक्सप्रेसवे, आर्थिक कॉरिडोर और हाईस्पीड रोड नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से लेकर ग्रामीण सड़कों तक, गडकरी ने सड़क निर्माण को सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना। गडकरी की कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह ‘फास्ट डिसीजन, फास्ट एग्जीक्यूशन’ के विजन पर काम करते हैं।

गडकरी केवल शहरों के एक्सप्रेसवे तक सीमित नहीं रहे। महाराष्ट्र में उन्होंने 13,736 दूरस्थ गांवों को ऑल वेदर रोड से जोड़ने की परियोजना को गति दी। विदर्भ जैसे क्षेत्रों में जहां कभी चिकित्सा, राशन और शिक्षा तक पहुंच मुश्किल थी, वहां सड़कें विकास का माध्यम बनीं। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण सड़क विकास समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने जो रिपोर्ट तैयार की, उसी ने आगे चलकर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की नींव रखी।

भारत में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल को बड़े पैमाने पर लागू करने का श्रेय भी गडकरी को जाता है। बीओटी (बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर) मॉडल के जरिए उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की गति बढ़ाई और सरकारी संसाधनों पर दबाव कम किया। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम की स्थापना उनकी दूरदर्शी सोच का उदाहरण मानी जाती है, जिसके जरिए पहली बार बड़े स्तर पर खुले बाजार से इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग जुटाई गई।

गडकरी सिर्फ सड़क मंत्री नहीं, बल्कि खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समझने वाले नेता भी हैं। जैव-ईंधन, सौर ऊर्जा, जल संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने में उनकी विशेष रुचि रही है। विदर्भ क्षेत्र में उन्होंने जलग्रहण विकास, सौर ऊर्जा आधारित गांव, गरीबों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं और सौर रिक्शा जैसी कई सामाजिक परियोजनाओं को आगे बढ़ाया।

भारतीय राजनीति में नितिन गडकरी को ‘रिजल्ट ओरिएंटेड लीडर’ कहा जाता है। वे उन नेताओं में गिने जाते हैं जो घोषणाओं से ज्यादा डिलीवरी पर भरोसा करते हैं। उनकी राजनीति जाति, धर्म और वैचारिक शोर से अलग विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर केंद्रित रही है। उनके समर्थकों का मानना है कि अगर भारत आज दुनिया के सबसे बड़े सड़क नेटवर्क वाले देशों में तेजी से आगे बढ़ रहा है, तो उसमें गडकरी की सोच और कार्यशैली की बड़ी भूमिका है।

–आईएएनएस

पीएसके/पीएम

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