प्रवर्तन निदेशालय की एक विशेष अदालत ने करोड़ों रुपये के पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) भर्ती घोटाले में आरोपी पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी को मामले में अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति होने से छूट की अनुमति दे दी है।इसके बजाय, दोनों को 31 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में वर्चुअली उपस्थित होने के लिए कहा गया है।
पता चला है कि सुनवाई में दोनों को उपस्थित रहने की अनुमति देने का अनुरोध दो सुधार गृह अधिकारियों ने किया था, जहां दोनों को फिलहाल रखा गया है। जहां प्रेसीडेंसी केंद्रीय सुधार गृह के अधिकारियों ने चटर्जी के लिए यह अपील की, वहीं अलीपुर महिला सुधार गृह के उनके समकक्षों ने मुखर्जी की ओर से यह अपील की।राज्य सुधार विभाग के सूत्रों ने बताया कि जब भी दोनों को कोर्ट में पेश किया जाता है तो वहां के लोग उत्तेजित हो जाते हैं और ‘चोर, चोर’ के नारे लगाने लगते हैं। एक महिला ने चटर्जी पर अपनी चप्पल फेंक दी थी, जबकि उन्हें मेडिकल चेक-अप के लिए जोका के ईएसआई अस्पताल ले जाया गया था।विभाग के एक अधिकारी ने कहा, हमें आशंका है कि अगर उत्तेजित भीड़ नियंत्रण से बाहर हो जाती है, तो कुछ और गंभीर घटना हो सकती है। इसलिए, सुधार गृह अधिकारियों ने अदालत से अपील की कि उन्हें सुनवाई में वर्चुअली उपस्थिति की अनुमति दी जाए, जिसे अदालत ने अनुमति दी है।


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