Punjab News: केंद्रीय राज्य मंत्री (रेलवे एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग) रवनीत सिंह बिट्टू ने एक कार्यक्रम में अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि लेवल क्रॉसिंग संख्या 164एबी, दोराहा पर चार लेन रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) का निर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़ी सौगात साबित होगा। उन्होंने बताया कि यह परियोजना मालवा क्षेत्र, पंजाब की राजधानी और आसपास के जिलों के बीच संपर्क को और मजबूत करेगी। कार्यक्रम में अंबाला मंडल के रेल अधिकारियों सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
Punjab News: ₹70.55 करोड़ की लागत, एक साल में पूरा करने का लक्ष्य

मंत्री ने जानकारी दी कि लगभग 70.55 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह ओवर ब्रिज अगले एक वर्ष में तैयार करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य तेज गति से शुरू किया जाएगा ताकि लोगों को जल्द राहत मिल सके। पिछले करीब 12 वर्षों से इस लेवल क्रॉसिंग पर लोगों को जाम और लंबा इंतजार झेलना पड़ रहा था।
Ravneet Singh Bittu News: रोज 190 ट्रेनें, 3,000 से ज्यादा वाहन
दोराहा का यह फाटक रूपनगर और लुधियाना को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर स्थित है। यहां से प्रतिदिन करीब 190 ट्रेनें गुजरती हैं और 3,000 से अधिक वाहन आते-जाते हैं। फाटक बार-बार बंद होने से भारी ट्रैफिक जाम लग जाता है। आरओबी बनने के बाद यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
पंजाब में रेलवे विकास कार्यों की रफ्तार
मंत्री ने बताया कि पंजाब में 166 स्थानों पर रेलवे ओवर ब्रिज (ROB), रेलवे अंडर ब्रिज (RUB) और लो हाइट सबवे (LHS) का काम लगभग 1,480.09 करोड़ रुपये की लागत से चल रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में रेलवे ढांचे के विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं है और सरकार नेटवर्क के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए प्रतिबद्ध है।
बजट में बड़ी बढ़ोतरी
उन्होंने बताया कि 2009–2014 की तुलना में पंजाब के लिए रेलवे का वार्षिक बजट अब लगभग 25 गुना बढ़कर 5,673 करोड़ रुपये हो गया है। वर्तमान में राज्य में 26,382 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाएं प्रगति पर हैं। साथ ही, Amrit Bharat Station Scheme के तहत पंजाब के 30 रेलवे स्टेशनों का लगभग 1,311 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
दिल्ली–अंबाला रेल लाइन का विस्तार
मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री का आभार जताते हुए बताया कि दिल्ली और अंबाला के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। 194 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर लगभग 5,983 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है। यह मार्ग देश के सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोर में से एक है, जहां यात्री और मालगाड़ियों का भारी दबाव रहता है।
क्षमता बढ़ेगी, जाम और देरी होगी कम
नई लाइनों के बनने से रेल मार्ग की क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों की समयपालन में सुधार होगा और भीड़भाड़ कम होगी। यह कॉरिडोर औद्योगिक केंद्रों, कृषि गोदामों और ताप विद्युत संयंत्रों को भी जोड़ता है, जिससे माल ढुलाई आसान होगी और आपूर्ति व्यवस्था मजबूत बनेगी।
धार्मिक और पर्यटन स्थलों को फायदा
इस परियोजना से श्री माता वैष्णो देवी, कटरा, जम्मू, श्रीनगर और शिमला जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय विकास में तेजी आएगी।
पर्यावरण और रोजगार पर सकारात्मक असर
रेल क्षमता बढ़ने से हर साल लगभग 24.6 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी। इससे करीब 43 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है, जो लाखों पेड़ लगाने के बराबर है। परियोजना से हर वर्ष लगभग 952 करोड़ रुपये की लॉजिस्टिक लागत बचत होगी। साथ ही निर्माण के दौरान लगभग 132 लाख मानव-दिवस के रोजगार सृजित होने की संभावना है। यह सभी परियोजनाएं पंजाब और उत्तर भारत के रेल ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।
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