Garuda Purana Death Rituals: सनातन धर्म में गरुड़ पुराण का बहुत महत्व है। गरुड़ पुराण हिंदू धर्म के 18 मुख्य पुराणों में से एक है। इसमें न केवल हमारे वर्तमान जीवन बल्कि मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्ति के बारे में बहुत गहराई से समझाया गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार, इंसान के कर्म ही तय करते हैं कि उसे अगला जन्म कैसा मिलेगा। सनातन धर्म में रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन बहुत सख्ती से किया जाता है। यहां हर काम पूरी विधि के साथ पूरा होता है, यहां तक की अंतिम संस्कार भी। आइए, जानते हैं कि गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के समय कौन-सी 4 चीजें आत्मा के लिए शुभ मानी गई हैं।
अंतिम समय में इन 5 चीजों को माना गया है बेहद पवित्र

1. गंगाजल
मृत्यु के समय इंसान के मुंह में गंगा का पानी डालने की परंपरा बहुत पुरानी है। माना जाता है कि गंगा भगवान विष्णु के पैरों से निकली हैं और उनका पानी सारे पाप खत्म कर देता है। मान्यता है कि जो इंसान गंगाजल पीकर जान देता है, उसे स्वर्ग में स्थान मिलता है।
2. तुलसी के पत्ते
हिंदू धर्म में तुलसी को देवी माना गया है। माना जाता है कि जिस इंसान के पास या मुंह में तुलसी के पत्ते होते हैं, उसकी आत्मा को यमलोक नहीं जाना पड़ता। इसलिए यह परंपरा है कि मौत के समय इंसान को तुलसी के पौधे के पास लिटाया जाता है और उसके सिर या मुंह में तुलसी का पत्ता रखा जाता है।
3. तिल
कहते हैं कि तिल का नाता भगवान विष्णु से है और इसका दान करना बहुत अच्छा होता है। मृत्यु के समय काले तिल पास रखना या तिल दान करने से बुरी ताकतें दूर रहती हैं और आत्मा का सफर आसान हो जाता है।
4. कुशा घास
पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाली कुशा घास को भी पवित्र माना जाता है। कहते हैं कि मृत्यु के समय इंसान को कुशा की चटाई पर लिटाने से आत्मा को साफ और शांत रास्ता मिलता है।
5. सोना
गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के समय मुंह में सोना रखना बहुत शुभ माना जाता है क्योंकि सोने को अग्निदेव और भगवान विष्णु का प्रतीक माना गया है। मृत्यु के समय मुंह में सोने का छोटा सा टुकड़ा रखने से इंसान के जीवनभर वाणी द्वारा किए गए पाप, कड़वे बोल और झूठ के प्रभाव मिट जाते हैं, और आत्मा पूरी तरह शुद्ध हो जाती है। साथ ही आसपास की नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है, यमदूत का डर खत्म होता है और आत्मा बिना किसी परेशानी के शांति से शरीर त्यागकर मोक्ष की ओर बढ़ती है।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।


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