Garuda Purana: रात में क्यों नहीं किया जाता अंतिम संस्कार? गरुड़ पुराण में बताई गईं हैं 3 मुख्य वजहें

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सनातन धर्म में सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार नहीं किया जाता है, क्योंकि यह माना जाता है कि ऐसा करने से आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती। यदि किसी की मृत्यु रात में होती है, तो पार्थिव शरीर को अगली सुबह सूर्योदय तक रखा जाता है। इसके तीन मुख्य कारण बताए गए हैं।

Raat mein dah Sanskar kyu nahi hota: सनातन धर्म में रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन बहुत सख्ती से किया जाता है। यहां हर काम पूरी विधि के साथ पूरा होता है, यहां तक की अंतिम संस्कार भी। मान्यता है कि यदि अंतिम संस्कार पूरे विधान से न हो, तो आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती और वह भटकती रहती है। गरुड़ पुराण और सनातन परंपराओं के अनुसार, सूरज ढलने के बाद शव का दाह संस्कार नहीं किया जाता है। अगर किसी की मृत्यु रात के वक्त होती है, तो पार्थिव शरीर को अगली सुबह सूर्योदय तक रखा जाता है और अगले दिन ही अंतिम संस्कार संपन्न किया जाता है। इसकी तीन मुख्य वजहें हैं।

रात के समय दाह संस्कार न करने के कारण

Garuda Purana
Garuda Purana (AI Generated)

1. पाप लगने का डर

शास्त्रों में सूर्यास्त के बाद चिता को अग्नि देना वर्जित माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से मृतक के परिजनों और अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले सभी लोगों को पाप लग जाता है।

2. असुर योनि में जन्म मिलने का डर

गरुड़ पुराण के अनुसार, सूर्यास्त के तुरंत बाद यमलोक के द्वार खुल जाते हैं और रात के समय नकारात्मक ताकतें, असुर तथा पिशाच अधिक प्रभावी हो जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान दाह संस्कार करने से जीवात्मा को परलोक की यात्रा में बहुत कष्ट सहना पड़ता है और वह किसी असुर या पिशाच योनि में जन्म ले सकती है।

3. अगले जन्म में कष्ट मिलने की आशंका

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रात्रि में अंतिम संस्कार होने से मृत आत्मा को शांति नहीं मिलती है। इसका बुरा असर जीव के अगले जन्म पर पड़ता है, जिससे उसे शारीरिक या मानसिक विकार का सामना करना पड़ सकता है।

किन विशेष परिस्थितियों में मिलती है छूट?

महामारी या आपदा- अगर देश में भयंकर महामारी, युद्ध या प्राकृतिक आपदा आ जाए, और शव को सुरक्षित रखना असंभव हो जाए। तब रात में भी अंतिम संस्कार कर दिए जाते हैं।

शव के खराब होने की स्थिति- अगर मृत शरीर बहुत अधिक चोटिल हो चुका हो या किसी गंभीर बीमारी के कारण तेजी से सड़ रहा हो, जिससे संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा हो।

रात में दाह संस्कार करने के नियम

गरुड़ पुराण के अनुसार, अगर किसी मजबूरीवश रात में ही अंतिम संस्कार करना पड़ जाए, तो दोष से बचने के लिए ‘दोष निवारण संस्कार’ किया जाता है। इसमें सोने, चांदी या आटे से सूर्य देव की एक मूर्ति बनाकर शव के साथ चिता पर रखी जाती है। इसके बाद सूर्य देव को साक्षी मानकर ही चिता को अग्नि दी जाती है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।