Raat mein dah Sanskar kyu nahi hota: सनातन धर्म में रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन बहुत सख्ती से किया जाता है। यहां हर काम पूरी विधि के साथ पूरा होता है, यहां तक की अंतिम संस्कार भी। मान्यता है कि यदि अंतिम संस्कार पूरे विधान से न हो, तो आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती और वह भटकती रहती है। गरुड़ पुराण और सनातन परंपराओं के अनुसार, सूरज ढलने के बाद शव का दाह संस्कार नहीं किया जाता है। अगर किसी की मृत्यु रात के वक्त होती है, तो पार्थिव शरीर को अगली सुबह सूर्योदय तक रखा जाता है और अगले दिन ही अंतिम संस्कार संपन्न किया जाता है। इसकी तीन मुख्य वजहें हैं।
रात के समय दाह संस्कार न करने के कारण
1. पाप लगने का डर
2. असुर योनि में जन्म मिलने का डर
3. अगले जन्म में कष्ट मिलने की आशंका
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रात्रि में अंतिम संस्कार होने से मृत आत्मा को शांति नहीं मिलती है। इसका बुरा असर जीव के अगले जन्म पर पड़ता है, जिससे उसे शारीरिक या मानसिक विकार का सामना करना पड़ सकता है।
किन विशेष परिस्थितियों में मिलती है छूट?
महामारी या आपदा- अगर देश में भयंकर महामारी, युद्ध या प्राकृतिक आपदा आ जाए, और शव को सुरक्षित रखना असंभव हो जाए। तब रात में भी अंतिम संस्कार कर दिए जाते हैं।
शव के खराब होने की स्थिति- अगर मृत शरीर बहुत अधिक चोटिल हो चुका हो या किसी गंभीर बीमारी के कारण तेजी से सड़ रहा हो, जिससे संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा हो।
रात में दाह संस्कार करने के नियम
गरुड़ पुराण के अनुसार, अगर किसी मजबूरीवश रात में ही अंतिम संस्कार करना पड़ जाए, तो दोष से बचने के लिए ‘दोष निवारण संस्कार’ किया जाता है। इसमें सोने, चांदी या आटे से सूर्य देव की एक मूर्ति बनाकर शव के साथ चिता पर रखी जाती है। इसके बाद सूर्य देव को साक्षी मानकर ही चिता को अग्नि दी जाती है।


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