भारत का एक ऐसा ठग, जो कई कंपनियों को चूना लगाकर हर रोज कमाता था लाखों रुपए!

Summary :

देश से हाल ही में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर पर एक साथ कई अमेरिकी स्टार्टअप्स में काम करने का आरोप लगा है. यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और कई दिग्गज टेक इंडस्ट्री से जुड़े लोग भी इस पर अपनी राय दे चुके हैं. यह पूरा मामला सोहम पारेख नाम के एक शख्स से जुड़ा है, जिसने जॉर्जिया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मास्टर्स की पढ़ाई की है. दावा किया जा रहा है कि वह एक ही समय पर तीन से चार कंपनियों में छिपकर काम कर रहा…

देश से हाल ही में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर पर एक साथ कई अमेरिकी स्टार्टअप्स में काम करने का आरोप लगा है. यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और कई दिग्गज टेक इंडस्ट्री से जुड़े लोग भी इस पर अपनी राय दे चुके हैं. यह पूरा मामला सोहम पारेख नाम के एक शख्स से जुड़ा है, जिसने जॉर्जिया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मास्टर्स की पढ़ाई की है. दावा किया जा रहा है कि वह एक ही समय पर तीन से चार कंपनियों में छिपकर काम कर रहा था.

Mixpanel कंपनी के को-फाउंडर और पूर्व सीईओ सुहैल दोशी ने इस शख्स पर आरोप लगाते हुए कहा है कि सोहम ने कुछ समय उनकी कंपनी “Playground AI” में भी बिताया, लेकिन जैसे ही पता चला कि वह अन्य कंपनियों के लिए भी समानांतर रूप से काम कर रहा है, उसे एक हफ्ते के अंदर ही नौकरी से निकाल दिया गया.

फर्जी रिज़्यूमे और कई कंपनियों में नौकरी

सुहैल दोशी ने पारेख का एक रिज़्यूमे भी साझा किया है, जिसमें दिखाया गया है कि वह कई कंपनियों में काम कर चुका है, जैसे Union AI, Dynamo AI, Synthecia, Alan AI और Fleet AI. उन्होंने इस रिज़्यूमे को लगभग 90% झूठा बताया है. Fleet AI के को-फाउंडर निकोलाई ओपोरोव ने भी जानकारी दी कि यह व्यक्ति लंबे समय से एक साथ कई स्टार्टअप्स में काम करता आ रहा है. उनका कहना है कि सोहम कई बार 4 से ज्यादा कंपनियों में एक साथ जुड़ा रहा है.

कैसे कमाए करोड़ों?

LinkedIn पर एक अन्य टेक प्रोफेशनल, डीड़ी दास (Deedy Das), ने रेडिट के कुछ स्क्रीनशॉट साझा किए हैं जिसमें दावा किया गया है कि सोहम पारेख ने एक साल में लगभग 8 लाख डॉलर (यानी करीब 6.85 करोड़ रुपये) कमाए हैं. बताया गया है कि वह खुद को “कंसल्टेंट” बताकर कंपनियों से काम लेता था और मुख्य जिम्मेदारियों को संभालता था. इसी तरह वह अलग-अलग कंपनियों में एक्टिव रहते हुए रोजाना करीब 3000 डॉलर (लगभग 2.5 लाख रुपये) कमा लेता था.

टेक इंडस्ट्री में मचा हड़कंप

इस घटना ने टेक इंडस्ट्री में एक नई बहस को जन्म दिया है कि क्या रिमोट वर्क और डिजिटल नौकरियों के दौर में इस तरह की चीज़ों पर नजर रखना मुश्किल हो गया है? क्या कंपनियों को अपने कर्मचारियों की सच्चाई पर शक करना शुरू कर देना चाहिए?

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।