बागपत नगर पालिका के 4.5 करोड़ के टेंडरों पर जांच शुरू, 12 सभासदों ने ईओ पर लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

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Baghpat News: बागपत नगर पालिका में करोड़ों रुपये के टेंडरों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। नगर पालिका के 12 सभासदों की शिकायत के बाद मेरठ के नगर विकास आयुक्त ने 4.5 करोड़ रुपये के टेंडरों पर रोक लगाते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। इसके साथ ही 22 वार्डों में दिए जाने वाले आउटसोर्सिंग ठेके को लेकर भी जांच शुरू कर दी गई है।

Baghpat News: सभासदों की शिकायत पर आयुक्त ने लिया संज्ञान

सोमवार को बागपत नगर पालिका के 12 सभासदों ने मेरठ नगर विकास आयुक्त को एक मांग पत्र सौंपा। इसमें उन्होंने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) कृष्ण कुमार भड़ाना पर भ्रष्टाचार और मिलीभगत के आरोप लगाए। सभासदों का कहना है कि 4.5 करोड़ रुपये के टेंडर और आउटसोर्सिंग के ठेके नियमों को ताक पर रखकर अपने चहेते ठेकेदारों को देने की कोशिश की जा रही थी। शिकायत मिलने के बाद आयुक्त ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए।

Baghpat News Today: आउटसोर्सिंग ठेके में भी गड़बड़ी का आरोप

सभासदों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका द्वारा 22 वार्डों के लिए आउटसोर्सिंग ठेका भी तय प्रक्रिया के बिना दिया जा रहा था। उनका कहना है कि इसमें भी ईओ की भूमिका संदिग्ध है और निजी लाभ के लिए ठेके बांटे जा रहे हैं। सभासदों ने साफ कहा कि नगर पालिका में किसी भी हालत में भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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चहेते ठेकेदारों से वसूली का आरोप

मांग पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि ईओ ने अपने पसंदीदा ठेकेदारों से टेंडर दिलाने के बदले मोटी रकम वसूली है। सभासदों का कहना है कि चेयरमैन को हटाए जाने के बाद ईओ मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं और किसी को भी विश्वास में नहीं लिया जा रहा। इसी कारण उन्होंने टेंडरों को तत्काल रद्द करने और ईओ के खिलाफ जांच की मांग की।

ईओ ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

इस पूरे मामले पर ईओ कृष्ण कुमार भड़ाना ने खुद पर लगे सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि आयुक्त द्वारा जांच के आदेश जरूर दिए गए हैं, लेकिन टेंडर प्रक्रिया नियमानुसार चल रही है और उसमें किसी तरह की अनियमितता नहीं है।

एडीएम को टेंडरों की जानकारी नहीं

मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। प्रमुख सचिव के आदेश के बाद एडीएम शिव नारायण को राजुद्दीन को हटाए जाने के बाद नगर पालिका बागपत का प्रशासनिक प्रभार सौंपा गया था। जब उनसे 4.5 करोड़ रुपये के टेंडरों और आउटसोर्सिंग ठेके के बारे में पूछा गया तो उन्होंने अनभिज्ञता जताई। इतने बड़े टेंडरों की जानकारी प्रशासनिक अधिकारी को न होना कई सवाल खड़े करता है।

प्रशासनिक लापरवाही या कुछ और?

एडीएम को टेंडरों की जानकारी न होना प्रशासन की गंभीर लापरवाही मानी जा रही है। इससे यह भी आशंका जताई जा रही है कि कहीं इस पूरे मामले में कुछ छिपाया तो नहीं जा रहा। फिलहाल आयुक्त द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बाद पूरे मामले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी।

रिपोर्टर: मेहंदी हसन

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