बांग्लादेश में जेल में बंद पत्रकारों के लिए उठी आवाज, मानवाधिकार संगठनों ने सरकार से दोबारा जांच की मांग

Summary :

Bangladesh jailed journalists issue: बांग्लादेशी जेल में कैद पत्रकारों के हक की आवाज कुछ मानवाधिकार संगठनों ने उठाई है। जुलाई (2024) विद्रोह को डेढ़ साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन अब भी कई मीडियाकर्मी जेल में बंद हैं। इनमें से कई की याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि इनमें से कई मामले बेबुनियाद आरोप पर टिके थे और राजनीति से प्रेरित थे। बांग्लादेश के प्रमुख दैनिक ढाका ट्रिब्यून ने इसे लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। मीडिया संगठनों, वकीलों और अंतर्राष्ट्रीय समूहों ने बिना ट्रायल के पत्रकारों को लंबे समय…

Bangladesh jailed journalists issue: बांग्लादेशी जेल में कैद पत्रकारों के हक की आवाज कुछ मानवाधिकार संगठनों ने उठाई है। जुलाई (2024) विद्रोह को डेढ़ साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन अब भी कई मीडियाकर्मी जेल में बंद हैं। इनमें से कई की याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि इनमें से कई मामले बेबुनियाद आरोप पर टिके थे और राजनीति से प्रेरित थे। बांग्लादेश के प्रमुख दैनिक ढाका ट्रिब्यून ने इसे लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। मीडिया संगठनों, वकीलों और अंतर्राष्ट्रीय समूहों ने बिना ट्रायल के पत्रकारों को लंबे समय तक हिरासत में रखने को गलत बताते हुए वैधता पर सवाल उठाए हैं।

Bangladesh Jailed Journalists Issue: पत्रकारों को रिहा करने की अपील की

Bangladesh Jailed Journalists Issue
Bangladesh Jailed Journalists Issue (Source: Social Media)

कॉमनवेल्थ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (सीजेए) ने सरकार से इंसाफ करने और उन पत्रकारों को रिहा करने की अपील की है, जिनके बारे में उसका कहना है कि उन्हें “मर्डर समेत झूठे आरोपों” में हिरासत में रखा गया है। 3 मार्च को जारी एक बयान में, इंटरनेशनल मीडिया राइट्स बॉडी ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान और उनकी सरकार से उन पत्रकारों की तुरंत रिहाई सुनिश्चित करने की अपील की, जिन पर “झूठे और उत्पीड़न के आरोप” लगे हैं, और चेतावनी दी कि उन्हें लगातार जेल में रखना मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन है।

Bangladesh Journalists case: कई पत्रकारों को किया गया था गिरफ्तार

Bangladesh Journalists case
Bangladesh Journalists case (Source: Social Media)

यह बयान वकीलों, सिविल सोसाइटी ग्रुप्स और मीडिया संगठनों के बीच उन पत्रकारों की लंबे समय तक हिरासत को लेकर बढ़ती चिंता के बीच आया है, जिनकी बेल की अर्जी लंबी वैधानिक कार्यवाही के बावजूद बार-बार खारिज की गई हैं। 5 अगस्त, 2024 को छात्रों और जनता के बड़े विद्रोह के बाद कई पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया था, जिससे देश में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव आया। तब से, बांग्लादेश के अलग-अलग हिस्सों में मीडिया प्रोफेशनल्स के खिलाफ कई केस फाइल किए गए हैं—जिनमें हत्या, हत्या की कोशिश, आतंकवाद और भ्रष्टाचार के मामले शामिल हैं।

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Shivangi Shandilya

शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।