Bengal Deportation Drive: पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों पर अब शुभेंदु सरकार शिकंजा कस रही है। बंगाल में 3D (Detect, Delete and Deport यानी पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो) नीति ने प्रदेश में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों में दहशत पैदा कर दी है। दरअसल, लोग दशकों से कोलकाता और आसपास के इलाकों में पहचान छिपाकर रह रहे थे, अब वे लोग खुद ही बॉर्डर की तरफ भाग रहे हैं और BSF जवानों से खुद को वापस भेजने की गुहार लगा रहे हैं।
सीमा पर इकट्ठे हुए संदिग्ध बांग्लादेशी
उत्तर 24 परगना के बशीरहाट सब डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट पर अवैध बांग्लादेशियों की भीड़ लगी हुई है। पिछले 2 दिनों में 100 से अधिक संदिग्ध बांग्लादेशी अपने सामान, बिस्तर और बर्तन के साथ इकठ्ठा हो गए हैं, ताकि वे किसी तरह सीमा पार लौट सके।
हकीमपुर बॉर्डर पर इकठ्ठा हुई भीड़ लोगों में पुरुष, महिलाओं के साथ बच्चे भी शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर लोग लंबे समय से कोलकाता के दमदम, न्यूटाउन और डानकुनी जैसे क्षेत्रों में दिहाड़ी मजदूर या घरेलू सहायक (मेड) के रूप में काम कर रहे थे।
Detect Delete Deport Policy: मालदा में खुला पहला निरुद्ध केंद्र
प्रशासनिक मुस्तैदी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मालदा, डिटेंशन सेंटर (निरुद्ध केंद्र) शुरू करने वाला राज्य का पहला जिला बन गया है। फिलहाल इस सेंटर में 9 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है, जिन्हें उनके निर्वासन (Deportation) की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक यहीं रखा जाएगा।
West Bengal News: बॉर्डर पर बढ़ी भीड़

सीमा सुरक्षा बल (BSF) के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पिछले 48 घंटों में वापस जाने वालों की तादाद अचानक तेजी से बढ़ी है। इन लोगों की सुरक्षित वापसी के लिए बीएसएफ कर्मी उनके दस्तावेजों की कड़ाई से जांच कर रहे हैं और लगातार बांग्लादेशी सीमा बल (BGB) के संपर्क में बने हुए हैं।


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