छत्तीसगढ़ का वनाधारित आजीविका मॉडल बना देश के लिए मिसाल अरुणाचल दल का अध्ययन दौरा, महिला समूहों को मिला 25 लाख से अधिक का लाभांश

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Chhattisgarh forest-based livelihood model: छत्तीसगढ़ का वनाधारित आजीविका मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा विकसित लघु वनोपज आधारित आजीविका और वैल्यू एडिशन मॉडल का अध्ययन करने के लिए अरुणाचल प्रदेश का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुँचा। इस दौरे का उद्देश्य राज्य में वन उत्पादों के वैज्ञानिक प्रसंस्करण, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की व्यवस्थाओं को करीब से समझना था। प्रतिनिधिमंडल में नालोंग मिजे, चौ जिंगनु नामचूम, टी.जी. बाकि तथा पी. सुब्रमण्यम सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।इस अवसर पर यज्ञदत्त शर्मा तथा अनिल कुमार साहू…

Chhattisgarh forest-based livelihood model: छत्तीसगढ़ का वनाधारित आजीविका मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा विकसित लघु वनोपज आधारित आजीविका और वैल्यू एडिशन मॉडल का अध्ययन करने के लिए अरुणाचल प्रदेश का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुँचा।

इस दौरे का उद्देश्य राज्य में वन उत्पादों के वैज्ञानिक प्रसंस्करण, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की व्यवस्थाओं को करीब से समझना था। प्रतिनिधिमंडल में नालोंग मिजे, चौ जिंगनु नामचूम, टी.जी. बाकि तथा पी. सुब्रमण्यम सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।इस अवसर पर यज्ञदत्त शर्मा तथा अनिल कुमार साहू सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और उन्हें राज्य की वन संपदा एवं जनजातीय आजीविका से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।

महिला स्व-सहायता समूहों को मिला 25 लाख रुपए से अधिक का लाभांश

दौरे के दौरान आयोजित विशेष कार्यक्रम में महिला स्व-सहायता समूहों को उनकी मेहनत और सहभागिता के लिए 25 लाख 17 हजार 776 रुपए की लाभांश राशि वितरित की गई। वन धन विकास केंद्र डॉगनाला, इच्छापुर, दुगली और विशेष पिछड़ी जनजाति (पीव्हीटीजी) केंद्र केशोडार की महिलाओं को लाभांश के चेक प्रदान किए गए। कार्यक्रम में कुमार निशांत सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

महुआ और शहद प्रसंस्करण इकाइयों का किया निरीक्षण

प्रतिनिधिमंडल ने राजनांदगांव में संचालित महुआ फूड प्रोसेसिंग यूनिट का अवलोकन कर आधुनिक तकनीक और उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी ली। वहीं कबीरधाम में वन धन शहद प्रसंस्करण केंद्र का भ्रमण कर वहां की कार्यप्रणाली को समझा।

दल ने “छत्तीसगढ़ हर्बल्स” के मजबूत मार्केटिंग नेटवर्क और राज्य में 67 प्रकार के लघु वनोपजों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी व्यवस्था की सराहना की। प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्रहण पर देश में सबसे अधिक 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा भुगतान किया जा रहा है।

ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तिकरण का प्रेरणादायी मॉडल

अरुणाचल प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ के इस मॉडल को ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण और जनजातीय विकास का प्रेरणादायी उदाहरण बताया। महिला समूहों की कार्यक्षमता और आत्मनिर्भरता से प्रभावित होकर दल के सदस्यों ने उन्हें प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की।

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Shivangi Shandilya

शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।