Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ और अन्य प्रभावित राज्यों में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। राज्य और केंद्र सरकार ने तय किया है कि 31 जनवरी 2026 तक ही माओवादी आतंकवाद में शामिल लोग आत्मसमर्पण कर पुनर्वास योजना का लाभ उठा सकते हैं। इसके बाद, यानी 1 फरवरी से, इस अवसर का लाभ नहीं मिलेगा। आत्मसमर्पण करने वालों को ही नकद सहायता, प्रशिक्षण, नौकरी और स्वरोजगार के लिए सब्सिडी तथा आवास जैसी सुविधाएं दी जाएंगी।
Chhattisgarh News: आत्मसमर्पण के बाद मिलने वाले लाभ
अभी तक आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को सरकार की “आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025” के तहत कई सुविधाएँ मिल रही हैं। इनमें शामिल हैं:
- नकद प्रोत्साहन
- विभिन्न प्रकार का प्रशिक्षण
- सरकारी या निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर
- स्वरोजगार के लिए सब्सिडी
- आवास सुविधा
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य माओवादी गतिविधियों से जुड़े लोगों को मुख्यधारा में लौटाना है और हिंसा कम करना है।

Chhattisgarh News Today: अभियान एक फरवरी से होगा कड़ा
1 फरवरी 2026 से माओवादियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू होगी। सुरक्षा बल उनके ठिकानों में घुसकर सक्रिय रूप से अभियान चलाएंगे। माओवादी गढ़ों और कैंपों को निशाना बनाया जाएगा, जैसा बीजापुर जिले की करेंगुट्टा पहाड़ी पर किया गया था। राज्य और केंद्र सरकार ने इस अभियान की योजना पहले ही साझा कर ली है।
केंद्र और राज्य का संकल्प
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने माओवादी हिंसा को पूरी तरह खत्म करने का संकल्प लिया है। जनवरी से मार्च 2026 तक देश के प्रभावित क्षेत्रों को माओवादी गतिविधियों से मुक्त करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों से सुरक्षा बलों को भी तैनात किया जा सकता है।
सुरक्षा बलों की रणनीति
सुरक्षा बलों का उद्देश्य माओवादी ठिकानों को पूरी तरह से नष्ट करना और आतंक फैलाने वालों को पकड़ना है। इसके लिए ठिकानों के चारों ओर से घेराबंदी की जाएगी और निर्णायक कार्रवाई की जाएगी। अगर जरूरत पड़ी तो अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी बस्तर और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जाएगा।
लोगों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया जा रहा है
राज्य में अधिकारी और नेता लगातार माओवादियों को आत्मसमर्पण करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसका मकसद है कि माओवादी हिंसा में शामिल लोग मुख्यधारा में लौटें और समाज के विकास में भाग लें। वर्तमान में चल रही नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कई लाभ पा रहे हैं, लेकिन यह अवसर केवल 31 जनवरी तक ही उपलब्ध रहेगा।
यह भी पढ़ें: ‘हिन्दू एक नहीं हुआ, तो होगा बांग्लादेश जैसा हाल…’, धीरेंद्र शास्त्री ने की एकजुट रहने की अपील






















