उत्तर प्रदेश में होता है परसीमन तो कितनी बढ़ेंगी सीटें, जनसंख्या तो तेजी से बढ़ रही पर 1973 के बाद से सीटें वहीं की वहीं

Summary :

Delimitation in UP : उत्तर प्रदेश में आने वाले समय में लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। नारी वंदन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों के बाद होने वाले संभावित परिसीमन के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में करीब 50 प्रतिशत तक सीटें बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो उत्तर प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर 120 होने के आसार संभावित परिसीमन के तहत उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटों की संख्या 80 से बढ़कर करीब 120…

Delimitation in UP : उत्तर प्रदेश में आने वाले समय में लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। नारी वंदन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों के बाद होने वाले संभावित परिसीमन के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में करीब 50 प्रतिशत तक सीटें बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो उत्तर प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर 120 होने के आसार

संभावित परिसीमन के तहत उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटों की संख्या 80 से बढ़कर करीब 120 तक पहुंच सकती है। इसी के साथ विधानसभा सीटों की संख्या भी मौजूदा 403 से बढ़कर लगभग 605 होने का अनुमान लगाया जा रहा है। अगर ऐसा होता है तो राज्य के 75 जिलों में विधानसभा क्षेत्रों की संख्या भी बढ़ जाएगी। अभी जहां एक जिले में औसतन 3 से 5 विधानसभा क्षेत्र होते हैं, वहीं भविष्य में यह संख्या बढ़कर 6 से 8 तक हो सकती है।

आबादी के हिसाब से बदलता रहा सीटों का अनुपात

आजादी के बाद 1951 में उत्तर प्रदेश की आबादी लगभग 6.32 करोड़ थी और 1952 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में कुल 347 सीटें थीं। उस समय एक विधानसभा सीट पर औसतन करीब 1.82 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व था। इसके बाद 1971 तक आबादी बढ़कर लगभग 8.83 करोड़ हो गई। वर्ष 1973 में हुए परिसीमन के बाद विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 403 कर दी गई, जिससे प्रति सीट औसतन करीब 2.19 लाख आबादी हो गई।

सीटें स्थिर रहीं, आबादी बढ़ती गई

बाद में सीटों की संख्या लंबे समय तक स्थिर रही, जबकि आबादी तेजी से बढ़ती गई। वर्ष 2011 तक उत्तर प्रदेश की आबादी लगभग 19.98 करोड़ पहुंच गई, लेकिन विधानसभा सीटें अब भी 403 ही हैं। इस कारण वर्तमान में एक विधानसभा क्षेत्र में औसतन करीब 4.95 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व होता है।

605 सीटें होने पर घटेगा प्रति सीट आबादी का दबाव

यदि विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर 605 हो जाती है, तो 2011 की जनसंख्या के आधार पर एक विधानसभा क्षेत्र में औसतन करीब 3.30 लाख लोग होंगे। हालांकि आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों पर इसका असर पड़ने की संभावना नहीं है। परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद माना जा रहा है कि 2032 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में 600 से अधिक विधायक चुने जा सकते हैं।

बड़े और छोटे निर्वाचन क्षेत्रों का अंतर

फिलहाल राज्य में कुछ विधानसभा क्षेत्र आबादी के लिहाज से काफी बड़े हैं। साहिबाबाद, लोनी और मुरादनगर ऐसे क्षेत्र हैं जहां मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है। इन क्षेत्रों में क्रमशः लगभग 12 लाख, 8 लाख और करीब साढ़े सात लाख से अधिक मतदाता हैं। वहीं दूसरी ओर महोबा और सीसामऊ जैसे विधानसभा क्षेत्र अपेक्षाकृत छोटे माने जाते हैं।

यह भी पढ़ें – पहले किया हवन फिर उतारा मौत के घाट! बागपत में मजदूर की बेरहमी से हत्या करने के बाद 4 दोस्तों ने गंगा में किया स्नान

Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।