ट्रंप के लिए नासूर बना टैरिफ प्लान! F-35 लड़ाकू विमान की डील पर अमेरिकी राष्ट्रपति को झेलना पड़ गया तगड़ा नुकसान

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F-35 Fighter Jet Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति का मुख्य उद्देश्य था कि आर्थिक और सैन्य मामलों में अमेरिका हमेशा आगे रहे। इस नीति के तहत 2025 में विदेशी सामान पर भारी आयात शुल्क लगा दिया गया। ट्रंप का मानना था कि इससे अमेरिकी उद्योग और नौकरियां सुरक्षित रहेंगी। लेकिन इसका उल्टा असर सबसे ज्यादा अमेरिका के आधुनिक लड़ाकू विमान F-35 पर पड़ रहा है। कई देशों ने इस विमान के ऑर्डर रद्द कर दिए, जिससे अरबों डॉलर का नुकसान होने लगा है। F-35 Fighter Jet Deal: F-35 क्या है और क्यों खास है? F-35 लाइटनिंग…

F-35 Fighter Jet Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति का मुख्य उद्देश्य था कि आर्थिक और सैन्य मामलों में अमेरिका हमेशा आगे रहे। इस नीति के तहत 2025 में विदेशी सामान पर भारी आयात शुल्क लगा दिया गया। ट्रंप का मानना था कि इससे अमेरिकी उद्योग और नौकरियां सुरक्षित रहेंगी। लेकिन इसका उल्टा असर सबसे ज्यादा अमेरिका के आधुनिक लड़ाकू विमान F-35 पर पड़ रहा है। कई देशों ने इस विमान के ऑर्डर रद्द कर दिए, जिससे अरबों डॉलर का नुकसान होने लगा है।

F-35 Fighter Jet Deal: F-35 क्या है और क्यों खास है?

F-35 लाइटनिंग II दुनिया के सबसे उन्नत स्टील्थ फाइटर जेट्स में से एक है। इसे अमेरिका की कंपनी लॉकहीड मार्टिन बनाती है।

  • यह रडार से लगभग अदृश्य रहता है।
  • हवा, जमीन और समुद्र, तीनों जगहों पर हमला कर सकता है।
  • अमेरिका के अलावा 20 से अधिक देश इसे खरीद चुके हैं।

इसकी कीमत बहुत ज्यादा है, 80 से 100 मिलियन डॉलर प्रति जेट। अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर ज्यादा मिलें तो उत्पादन लागत कम रहती है। लेकिन विदेशी देशों के हटने से अमेरिका पर अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता है।

F-35 Fighter Jet Deal (credit social media )
F-35 Fighter Jet Deal (credit social media )

Donald Trump News: ऊंचे टैरिफ और बढ़ती नाराजगी

ट्रंप सरकार ने 2025 में कई देशों से आने वाले माल पर 10% से 50% तक टैरिफ लगा दिया। अप्रैल 2025 तक औसत टैरिफ बढ़कर 27% हो गया। इसका बड़ा असर F-35 प्रोग्राम पर पड़ा, क्योंकि इसके कई पार्ट्स दुनिया भर से आते हैं। टैरिफ बढ़ने से जेट की कुल कीमत और ज्यादा हो गई। इसके बाद सहयोगी देशों ने खरीद पर पुनर्विचार करना शुरू कर दिया और यूरोपीय विकल्पों की ओर झुकाव बढ़ गया, जैसे राफेल, यूरोफाइटर और ग्रिपेन।

World News Today: 2025 में रद्द हुए प्रमुख सौदे

कई देशों ने अमेरिका की नीति और बढ़ती कीमतों के कारण F-35 ऑर्डर रोक दिए:

पुर्तगाल

मार्च 2025 में 36 F-35 लेने की योजना छोड़ दी। अब यूरोपीय विमानों पर विचार कर रहा है।

भारत

एयरो इंडिया 2025 में F-35 दिखाया गया, लेकिन ऊंचे टैरिफ के कारण यह बेहद महंगा हो गया। भारत ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया और अब स्वदेशी उत्पादन पर ध्यान दे रहा है।

स्विट्जरलैंड

9.1 बिलियन डॉलर का 36 जेट वाला सौदा अटक गया। अमेरिका द्वारा स्विस वस्तुओं पर भारी टैक्स लगाए जाने से वहां विरोध बढ़ गया।

स्पेन

45–50 जेट का समझौता तोड़ दिया। ट्रंप के NATO खर्च को लेकर आरोप और टैरिफ की धमकियों से स्पेन ने यूरोपीय परियोजनाओं को चुना।

कनाडा

72 जेटों की खरीद समीक्षा में डाल दी। बढ़ती लागत और अमेरिका पर भरोसा कम होने के कारण समस्या बढ़ी। इन सबके कारण लगभग 150 जेटों के पक्के सौदे रद्द हुए और 72 जेट अनिश्चित स्थिति में हैं।

F-35 Fighter Jet Deal (credit social media )
F-35 Fighter Jet Deal (credit social media )

सऊदी अरब एकमात्र नई उम्मीद

नवंबर 2025 में ट्रंप ने सऊदी अरब को F-35 बेचने की मंजूरी दी। हालांकि, यह सौदा अभी कांग्रेस से पास होना बाकी है। इज़रायल की नाराज़गी भी बढ़ गई है क्योंकि वह इस जेट का विशेष उपयोगकर्ता रहा है।

अमेरिका पर असर

सौदों के रद्द होने से F-35 प्रोग्राम को 100 बिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है।

  • पेंटागन ने 2026 के लिए अपनी खरीद कम कर दी।
  • लॉकहीड मार्टिन में नौकरियों पर खतरा बढ़ गया।
  • अमेरिकी परिवारों पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ पड़ सकता है।
  • यूरोपीय देश अब मेक इन यूरोप पर जोर दे रहे हैं।

कुल मिलाकर, अमेरिका फ़र्स्ट नीति अमेरिका के आर्थिक और रणनीतिक हितों को ही नुकसान पहुंचा रही है।

F-35 Fighter Jet Deal (credit social media )
F-35 Fighter Jet Deal (credit social media )

क्या कह रहे एक्सपर्ट?

एक्सपर्ट चेतावनी दे रहे हैं कि ऐसे टैरिफ से महंगाई और वैश्विक व्यापार विवाद बढ़ेंगे। F-35 का भविष्य भी अनिश्चित हो सकता है। संभव है कि अमेरिका को अपनी नीति में नरमी लानी पड़े, ताकि रक्षा सहयोग और व्यापारिक रिश्ते फिर मजबूत हो सकें।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।