Gajendra Chauhan Meet Premanand Ji Maharaj : वैसे तो निर्देशक बीआर चोपड़ा के सीरीयल महाभारत के कई पात्र आज भी आम लोगों के मन में रचे बसे हैं पर उन में से एक पात्र युधिष्ठिर, जिसे एक्टर गजेन्द्र चौहान ने निभा कर जीवंत किया, को लेकर अलग ही नोस्टालजिया है। यह नोस्टालजिया फिर से उभर आया जब लोगों ने उन्हें वृंदावन में संत प्रेमानन्द के आश्रम में उनके दर्शन करते देखा।
गजेंद्र चौहान 2 फरवरी को वृंदावन केसरी हित राधा केली कुंज आश्रम संत प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे, चौहान ने प्रेमानन्द महाराज को दंडवत प्रणाम किया, आशीर्वाद लिया और महाभारत के कुछ श्लोक और धर्मराज की बातें बताईं.

मामला तब चर्चा में आया जब उनकी मुलाकात की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई। वीडियो में देखा जा सकता है कि गजेन्द्र चौहान ने लॉन्ग ग्रीन कोट पहना हुआ है। वे जब कमरे में प्रवेश करते हैं तो प्रेमानन्द महाराज रोज की तरह अपने आसन पर बैठे हुए दिखाई देते हैं और इर्दगिर्द सहायक खड़े रहते हैं।
Gajendra Chauhan Meet Premanand Ji Maharaj : कैसी रही गजेन्द्र चौहान कि प्रेमानन्द से मुलाकात

गजेन्द्र चौहान जैसे ही प्रेमानन्द से मिलते हैं वे अपना परिचय महाभारत में निभाए युधिष्ठिर के पात्र के माध्यम से करवाते हैं। प्रेमानन्द महाराज कहते हैं, ‘आपने हमारे धर्म के स्वरूप का अभिषेक किया है।’
गजेन्द्र चौहान इस मौके पर पूर्व प्राधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के उद्धरण का जिक्र करते हैं। वे कहते हैं, “कोई भी पुत्र, कोई भी पिता, कोई भी परिवार, कोई भी प्रतिज्ञा, कोई भी परंपरा राष्ट्र से ऊपर नहीं हो सकती।’
Premanand Maharaj Visit : खिलखिला पड़े प्रेमानन्द

वे आगे कहते हैं, ‘Yudhishthir ने कहा था ना मैं रोक सकता हूं, ना तुम, ना भीम का गदा रोक सकता है, ना अर्जुन के बात रोक सकते हैं. इसलिए जो लिखा है वह तो कर्म करना ही पड़ेगा उसी का फल मिलेगा. जेष्ठ पिता श्री को प्रतीक्षा करवाना मर्यादा का उल्लंघन होगा. इसलिए बनवास पर चलना ही पड़ेगा इस बात को सुनकर प्रेमानंद महाराज खिलखिला कर हंस पड़े.
इस पर प्रेमानन्द महाराज सहमति दिखाते हैं। गजेन्द्र चौहान ने इस मौके पर Mahabharat के अंशों का भी जिक्र किया। उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से कहा एक समय आया था, जब महाभारत में पांचाली ने बनवास जाने से मना कर दिया युधिष्ठिर ने माता-पिता और भाइयों, पांचाली को समझाते हुए कहा कि श्री राम ने 14 साल का वनवास काटा. क्या सीताजी नहीं जानती थी कि मृग सोने का नहीं होता. जो होने वाला है वह हमारे कर्मों का फल है।
गजेन्द्र चौहान की प्रेमानन्द के बीच हुई यह मुलाकात सोशल मीडिया पर काफी वायरल है, जिसे लोगों का खूब प्यार भी मिल रहा है।


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