Iran-America Islamabad Talks: 1979 के बाद पहली बार आमने-सामने आए अमेरिका और ईरान, शांति वार्ता की पहली बैठक में नहीं निकला कोई हल, 4 घंटे चली तक बातचीत

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Iran-America Islamabad Talks:  पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता का पहला दौर संपन्न हो गया है। यह अहम बैठक करीब चार घंटे तक चली, जिसमें पाकिस्तान ने मध्यस्थ और मेजबान की भूमिका निभाई। इस त्रिपक्षीय वार्ता में क्षेत्रीय तनाव कम करने और स्थायी समाधान की दिशा में अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। सीजफायर और क्षेत्रीय स्थिरता पर रहा फोकस इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को कम करना और स्थिरता लाना था। बातचीत में खास तौर पर सीजफायर को मजबूत करने, लेबनान में चल रहे युद्ध को रोकने…

Iran-America Islamabad Talks:  पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता का पहला दौर संपन्न हो गया है। यह अहम बैठक करीब चार घंटे तक चली, जिसमें पाकिस्तान ने मध्यस्थ और मेजबान की भूमिका निभाई। इस त्रिपक्षीय वार्ता में क्षेत्रीय तनाव कम करने और स्थायी समाधान की दिशा में अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।

सीजफायर और क्षेत्रीय स्थिरता पर रहा फोकस

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को कम करना और स्थिरता लाना था। बातचीत में खास तौर पर सीजफायर को मजबूत करने, लेबनान में चल रहे युद्ध को रोकने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, ऐसे में यहां शांति बनाए रखना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जरूरी माना जा रहा है।

दोनों देशों के शीर्ष नेता रहे शामिल

अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति JD Vance ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। उनके साथ Jared Kushner और Steve Witkoff भी मौजूद रहे।

वहीं ईरान की ओर से विदेश मंत्री Abbas Araghchi और संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने बातचीत की अगुवाई की।

पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और सेना प्रमुख Asim Munir ने इस महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी की।

बातचीत के दौरान दिखा तनाव

चार घंटे चली इस वार्ता के दौरान माहौल पूरी तरह सहज नहीं रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक बातचीत के दौरान कुछ मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच तनाव भी देखने को मिला।

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी दी। साथ ही उसने अपने फ्रीज़ किए गए एसेट्स को खोलने की मांग भी दोहराई।

ट्रंप का सख्त रुख

इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने स्पष्ट किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और वहां जहाजों की आवाजाही को रोका नहीं जा सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो।

आगे भी जारी रहेगी बातचीत

हालांकि वार्ता के दौरान मतभेद सामने आए, लेकिन सकारात्मक संकेत यह है कि दोनों देशों ने बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई है।

पाकिस्तान ने उम्मीद जताई है कि यह पहल आगे चलकर स्थायी शांति का रास्ता खोल सकती है। आने वाले दौर की बातचीत में और महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।

1979 के बाद पहली प्रत्यक्ष उच्चस्तरीय बातचीत

यह वार्ता कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है। 1979 की Iranian Revolution के बाद यह पहली बार है जब अमेरिका और ईरान के बीच इतनी उच्चस्तरीय प्रत्यक्ष बातचीत हो रही है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता में हो रही यह त्रिपक्षीय वार्ता दोनों देशों के संबंधों में संभावित बदलाव का संकेत भी दे रही है।

इस्लामाबाद के सेरेना होटल में वार्ता का आयोजन

इस महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन Serena Hotel में किया गया है। वार्ता से पहले अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों ने अलग-अलग पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif से मुलाकात की।

पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इन अलग-अलग बैठकों के बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक सीधी बातचीत का दौर शुरू हुआ।

शांति समझौते की शर्तों पर मतभेद

ईरान ने वार्ता के लिए 10-सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें पश्चिम एशिया से अमेरिकी सेना की वापसी, ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाना और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल हैं।

ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति Mohammad Reza Aref ने कहा कि अगर अमेरिका “ईमानदारी” से बातचीत करे तो समझौता संभव है, लेकिन “इजराइल फर्स्ट” नीति के साथ कोई समाधान नहीं निकल पाएगा।

ट्रंप की चेतावनी और वेंस की उम्मीद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि यदि वार्ता विफल होती है तो अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू कर सकता है।

वहीं वार्ता से पहले JD वेंस ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि अगर ईरान ईमानदारी से बातचीत करेगा, तो अमेरिका भी खुलकर आगे बढ़ेगा।

कड़ी सुरक्षा के बीच हो रही वार्ता

इस महत्वपूर्ण बैठक को देखते हुए इस्लामाबाद में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। ‘रेड अलर्ट’ घोषित किया गया है और 10,000 से अधिक पुलिस और सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।

रेड जोन क्षेत्र को सेना और रेंजर्स की निगरानी में रखा गया है और केवल अधिकृत लोगों को ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।

वैश्विक नजरें इस वार्ता पर

ईरान और अमेरिका के बीच हो रही इस वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। इसकी सफलता या विफलता का असर न केवल पश्चिम एशिया की सुरक्षा पर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दौर की बातचीत में क्या ठोस नतीजे निकलते हैं।

Shera Rajput