दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को सामने आए नतीजों में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 48 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि आम आदमी पार्टी महज 22 सीटों पर सिमट गई। इस चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस का खाता नहीं खुला, जो पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है। चुनावी नतीजों के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव और कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रतिक्रिया जाहिर की।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर लिखा, “दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने जनहित में सत्ता के खिलाफ माहौल बनाया पर जनता ने हमें उम्मीद के अनुरूप जनादेश नहीं दिया। हम जनमत को स्वीकारते हैं। कांग्रेस के हर एक नेता और कार्यकर्ता ने एकजुट होकर, विपरीत परिस्थितियों में मेहनत की, पर अभी और कड़ी मेहनत और संघर्ष की आवश्यकता है। आने वाले दिनों में हम दिल्ली में प्रदूषण, यमुना सफाई, बिजली, सड़क, पानी और विकास के मुद्दों को उठाते रहेंगे और जनता से जुड़े रहेंगे।”
दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने जनहित में सत्ता के ख़िलाफ़ माहौल बनाया पर जनता ने हमें उम्मीद के अनुरूप जनादेश नहीं दिया। हम जनमत को स्वीकारते हैं।
कांग्रेस के हर एक नेता और कार्यकर्ता ने एकजुट होकर, विपरीत परिस्थितियों में मेहनत की, पर अभी और कड़ी मेहनत और संघर्ष…
— Mallikarjun Kharge (@kharge) February 8, 2025
दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने एक्स पर लिखा, “दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणाम स्पष्ट संकेत हैं कि अरविंद केजरीवाल की झूठ और धोखे की राजनीति को दिल्ली की जनता नकार चुकी है।कांग्रेस संगठन के सभी सिपाहियों ने न्याय की लड़ाई बेहद मजबूती के साथ लड़ी, मगर परिणाम हमारे पक्ष में नहीं आए। हम अपनी कमियों और गलतियों की समीक्षा करेंगे और दिल्ली की जनता की सेवा का कार्य निरंतर जारी रखेंगे, दिल्ली वालों के साथ हर क्षण खड़े रहेंगे। जनता का जनादेश शिरोधार्य है।”
पवन खेड़ा ने एक्स पर लिखा, “तथाकथित उदारवादियों के एक वर्ग का पतन पूरी तरह से विचित्र है। उन्होंने विपक्षी एकता पर ये व्याख्यान आप को तब नहीं दिए जब पार्टी गोवा, गुजरात, हरियाणा आदि में चुनाव लड़ने और सांप्रदायिकता विरोधी, धर्मनिरपेक्ष वोट को कमजोर करने गई थी। दिल्ली चुनाव परिणाम उस ट्रोजन हॉर्स की अस्वीकृति है जिसने पूरे देश में उदारवादी शक्तियों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया था।”
उन्होंने आगे लिखा, “अधिकांश उदारवादी सही मायने में मुखौटे के गिरने का जश्न मना रहे हैं ताकि उदारवादी मूल्यों की असली चैंपियन – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस – भाजपा का मुकाबला करने और उसे हराने के लिए मजबूत हो सके।”


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