Khomeini Indian Connection : इजरायल – ईरान युद्ध में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खोमेनेई को शुरुआती दिनों में मार दिया गया, जिसके बाद आयतुल्लाह को लेकर दुनियाभर में दिलचस्पी पैदा होने लगी, क्योंकि अमेरिका-इजरायल जैसी साझी ताकत के खिलाफ सामने से लड़ने के चलते उनकी हिम्मत को सराहा जाने लगा।
इस बीच उनके एतिहासिक जड़ों पर भी लोगों की दिलचस्पी जागने लगी है जहां से उनका संबंध रहा। ऐसे में उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले का एक गांव इन दिनों खूब चर्चाओं में है। यह गांव राजधानी लखनऊ से फैजाबाद हाइवे पर सफ़दारगंज से मुड़ने के बाद कुछ किलोमीटर की दूरी पर है, जिसका नाम कितूर है।
Khomeini Indian Connection: गांव को लेकर दावा

ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की इसराइल और अमेरिका के हमले में मौत के बाद इस गांव की चर्चा होने लगी है. ये दावा किया जाता है कि ईरान के पहले सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह रुहोल्लाह मुसावी ख़ुमैनी के पूर्वज इस गांव में रहा करते थे.
इसे लेकर बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, यहाँ के रहने वाले और ख़ुमैनी के वंशज होने का दावा करने वाले निहाल काज़मी कहते हैं, “इस गाँव में तकरीबन 500 घर शिया समुदाय के थे. लेकिन लोगों ने पलायन किया और अब सिर्फ़ चार घर बचे हैं.”
रिपोर्ट में काज़मी के दावे की बात की गई है जो कहते हैं, “आयतुल्लाह ख़ुमैनी के परदादा सैयद अहमद मुसावी ‘हिंदी’ का जन्म 19वीं सदी की शुरुआत में बाराबंकी के इसी गाँव में हुआ था. 1834 के आसपास वह अवध के तत्कालीन नवाब के साथ ज़ियारत (दर्शन) के लिए ईरान गए थे. लेकिन वापस नहीं लौटे और वहीं बस गए.”
Ayatollah Khamenei Indian Connection खोमेनेई का जुड़ाव

उन्होंने बताया, “उनसे हमारी रिश्तेदारी यह है कि उनके दादा अहमद हुसैन हिंदी साहब हमारे परदादा के दादा के चचेरे भाई होते थे.” बता दें खोमेनेई की मौत के बाद इस गांव में मीडिया कर्मी पहुंच रहे हैं। इस गाँव में भी ख़ामेनेई की मौत के बाद लोगों में शोक है. तीन दिन लगातार शोक सभा हुई है. इसमें शिया और सुन्नी, दोनों समुदाय के लोग शामिल थे.
ईरान में 40 दिनों के राजकीय शोक
बता दें, इजरायल-ईरान के बीच छिड़े युद्ध ने न केवल दुनिया का नक्शा बदलने की आहट दी है, बल्कि किंतूर के उस गौरवशाली इतिहास के एक अध्याय का भी अंत कर दिया है. खोमेनेई की मौत के बाद ईरान में घोषित 40 दिनों के राजकीय शोक रखा गया। ठीक इसी प्रकार का दुख इस गांव में भी पसरा रहा।


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