‘भारत हमारा अच्छा साझेदार’, Middle East संकट में भारत को America का बड़ा सपोर्ट, रूसी तेल खरीदने पर क्यों नहीं लगाया दबाव? समझें इन 5 कारणों से

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White house statement on India: मिडिल ईस्ट जंग के बीच ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्थिर करने की एक बड़ी कोशिश के तहत डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए तत्कालीन छूट को मंजूरी दी है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि यह फैसला प्रेसिडेंट, ट्रेजरी डिपार्टमेंट और नेशनल सिक्योरिटी टीम के सदस्यों के बीच बातचीत के बाद लिया गया। लेविट ने एक सवाल के जवाब में रिपोर्टर्स से कहा, “प्रेसिडेंट और ट्रेजरी सेक्रेटरी और पूरी नेशनल सिक्योरिटी टीम इस फैसले पर इसलिए पहुंची क्योंकि भारत में हमारे सहयोगी अच्छे रहे हैं और उन्होंने…

White house statement on India: मिडिल ईस्ट जंग के बीच ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्थिर करने की एक बड़ी कोशिश के तहत डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए तत्कालीन छूट को मंजूरी दी है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि यह फैसला प्रेसिडेंट, ट्रेजरी डिपार्टमेंट और नेशनल सिक्योरिटी टीम के सदस्यों के बीच बातचीत के बाद लिया गया। लेविट ने एक सवाल के जवाब में रिपोर्टर्स से कहा, “प्रेसिडेंट और ट्रेजरी सेक्रेटरी और पूरी नेशनल सिक्योरिटी टीम इस फैसले पर इसलिए पहुंची क्योंकि भारत में हमारे सहयोगी अच्छे रहे हैं और उन्होंने पहले भी रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है।”

इन कारणों से मिली रूसी तेल खरीदने पर छूट: White house

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी लेविट ने कहा कि यह तत्कालीन उपाय ईरान के संकट से पैदा हुई ग्लोबल तेल सप्लाई में रुकावटों को दूर करने के लिए था।लेविट ने आगे कहा, “जब हम ईरानियों की वजह से दुनिया भर में तेल सप्लाई के इस ‘टेम्पररी गैप’ को कम करने के लिए काम कर रहे हैं, तो हमने उन्हें तत्कालीन तौर पर रूसी तेल लेने की इजाजत दे दी है।”

लेविट ने बताया कि छूट मिलने से पहले ही शिपमेंट भेज दिए गए थे। व्हाइट हाउस के मुताबिक, प्रशासन को उम्मीद नहीं है कि इस व्यवस्था से मॉस्को को आर्थिक रूप से कोई खास फायदा होगा। यह बात तब आई जब व्हाइट हाउस ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ पर अपडेट दिया, जो ईरान के मिसाइल इंफ्रास्ट्रक्चर और नेवल क्षमता को टारगेट करने वाला यूएस मिलिट्री कैंपेन है।

लेविट ने कहा कि दस दिन पहले शुरू होने के बाद से ऑपरेशन में तेजी से प्रोग्रेस हुई है। अब तक 5,000 से ज्यादा दुश्मन के ठिकानों पर हमला किया जा चुका है।

लेविट ने आगे कहा कि ईरान की जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता में तेजी से गिरावट आई है। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू होने के बाद से ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमले 90 प्रतिशत से ज्यादा कम हो गए हैं, और उनके ड्रोन हमले लगभग 35 प्रतिशत कम हो गए हैं।

अमेरिकी सेना ने ईरान के नेवल एसेट्स को भी निशाना बनाया है। लेविट ने कहा, “हमने 50 से ज्यादा ईरानी नेवल वेसल को नष्ट कर दिया है, जिसमें एक बड़ा ड्रोन कैरियर शिप भी शामिल है। ईरानी नेवी को ‘लड़ाई में बेअसर’ माना गया है।

लेविट ने कहा, “‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के बताए गए मकसद वही हैं। बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करना, उनकी ईरानी मिसाइल इंडस्ट्री को जमीन पर गिराना, यह पक्का करना कि उनके आतंकवादी प्रॉक्सी अब इस इलाके को अस्थिर न कर सकें, और यह पक्का करना कि ईरान को कभी न्यूक्लियर वेपन न मिले।”

White house statement on India: होर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई जारी रखने का ट्रंप का वादा

White house statement on India
White house statement on India (Source: Social Media)

व्हाइट हाउस ने इस बात पर भी जिक्र किया कि यूनाइटेड स्टेट्स दुनिया के सबसे जरूरी तेल शिपिंग रूट्स में से एक, होर्मुज स्ट्रेट के जरिए एनर्जी का लगातार फ्लो पक्का करेगा। लेविट ने कहा कि ट्रंप ने एनर्जी सप्लाई रूट्स की सुरक्षा के लिए अपना वादा दोहराया है। उन्होंने कहा, “डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट से तेल का बहाव बनाए रखने के लिए अपना वादा दोहराया है ताकि यूनाइटेड स्टेट्स और हमारे सभी साथी अपनी एनर्जी जरूरतें पूरी कर सकें।”

White house statement on India: यहां समझें वो 5 बड़े कारण क्या है, जिससे अमेरिका ने दी भारत को छूट?

White house statement on India
White house statement on India |(Source: Social Media)

1. ऊर्जा सप्लाई स्थिर रखना – मिडिल ईस्ट संकट के कारण ग्लोबल ऑयल सप्लाई में आई अस्थायी कमी को पूरा करने के लिए।

2. भारत विश्वसनीय साझेदार – Donald Trump प्रशासन के मुताबिक भारत अमेरिका का भरोसेमंद सहयोगी रहा है।

3. पहले भी रूस से खरीद कम की– अमेरिका का कहना है कि भारत ने पहले रूसी तेल आयात में कमी दिखाई है।

4. शिपमेंट पहले ही भेजे जा चुके थे – छूट इसलिए दी गई ताकि पहले से चल रहे तेल शिपमेंट बाधित न हों।

5. मॉस्को को बड़ा आर्थिक फायदा नहीं – Russia को इससे खास आर्थिक लाभ नहीं होगा, इसलिए अस्थायी छूट दी गई।

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Shivangi Shandilya

शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।