धोखेबाजों ने 27 दिन के डिजिटल अरेस्ट में लूट लिए 84 लाख, 85 साल के बुजुर्ग को मनी लांड्रिंग का दिखाया डर

Summary :

Lucknow Digital Arrest Case : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर क्राइम का बड़ा मामला सामने आया है. जहां अपराधियों ने रियार ट्रेजरी अफसर के साथ करीब 85 लाख की धोखाधड़ी कर डाली. हैरानी यह कि बुजुर्ग को करीब 27 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट किया गया. मामला तब शुरू हुआ जब व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल कर शातिर अपराधियों ने मनी लांड्रिंग का डर दिखाया. मोबाइल पर ही कोर्ट का फर्जी अरेस्ट वारंट भेजकर विश्वास दिलाया गया, जिसके बाद बुजुर्ग अपराधियों की हर बात मानने को तैयार हो गए. पीड़ित का नाम बदरुद्दीन बताया जा रहा है. उन्होंने इस मामले…

Lucknow Digital Arrest Case : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर क्राइम का बड़ा मामला सामने आया है. जहां अपराधियों ने रियार ट्रेजरी अफसर के साथ करीब 85 लाख की धोखाधड़ी कर डाली. हैरानी यह कि बुजुर्ग को करीब 27 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट किया गया.

मामला तब शुरू हुआ जब व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल कर शातिर अपराधियों ने मनी लांड्रिंग का डर दिखाया. मोबाइल पर ही कोर्ट का फर्जी अरेस्ट वारंट भेजकर विश्वास दिलाया गया, जिसके बाद बुजुर्ग अपराधियों की हर बात मानने को तैयार हो गए.

पीड़ित का नाम बदरुद्दीन बताया जा रहा है. उन्होंने इस मामले में साइबर थाने में शिकायत करवा दी है. इस मामले में इस्पेक्टर साइबर थाना ब्रजेश कुमार ने जानकारी शेयर की है. उनके अनुसार बदरुद्दीन जानकीपुरम सैक्टर G के रहने वाले हैं. वह ट्रेजरी डिपार्टमेंट में काम करते थे जहां से रिटायर हो चुके हैं. पीड़ित की उम्र 84 बताई जा रही है.

व्हाट्सएप से किया डिजिटल अरेस्ट

बदरुद्दीन ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि 7 मार्च को साइबर अपराधियों ने उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से कॉल की है. यह कॉल वीडियो कॉल से आई. कॉल करने वाले ने खुद को लखनऊ पुलिस मुख्यालय का सीनियर इस्पेक्टर प्रमोद कुमार मिश्रा बताया.

अपराधी ने जेल भेजने की धमकी देते हुए पुणे में मनी लांड्रिंग का केस होने की बात कही. अपराधी ने कहा कि उनसे एनआईए के अफसर बात करेंगे. शातिर तरह से फोन किसी और को सौंपा गया. जिससे बात हुई उसने खुद को एनआईए का अधिकारी बताया. उन्हें बताया गया कि वे डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुए हैं. उनके नाम से पुणे में एक खाता खोला गया है जिसका इस्तेमाल मनी लांड्रिंग में हो रहा है, इसलिए जांच चल रही है.

लूट लिए 84 लाख

उनसे कहा गया कि जांच पूरी होने तक वे किसी से इस मामले को लेकर जानकारी शेयर न करें. वहीं तफ्तीश पूरी होने तक सारे रूपए वापस कर दिए जाएंगे. इस तरह जालसाजों ने 4 अप्रैल तक पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट में जकड़े रखा. इसी दौरान 4 बार अलग अलग बैंक खातों में 84.50 लाख रूपए ट्रांसफर करा लिए.

इस मामले पर जब पीड़ित को शक होने लगा तो उन्होंने अपने रिश्तेदारों से जानकारी शेयर की, पता चला वे डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुए हैं. वहीं जालसाजों के नंबर पर फिर फोन किया तो वह बंद मिला, जिसके बाद पीड़ित ने थाने में शिकायत दर्ज कराई.

हैरानी यह कि इस दौरान धोखेबाजों ने पीड़ित को यहां तक कहा कि उन पर सर्रिलांस रखी जा रही रही है. अगर किसी को जानकारी दी तो तत्काल घर से ही आपको गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

यह भी पढ़ें – सावधान! Delhi-UP समेत 13 राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 55KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, जानें अपने शहर के मौसम का हाल

Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।