NATO Trump meeting 2026: नाटो प्रमुख मार्क रुटे 8 से 12 अप्रैल तक वॉशिंगटन दौरे पर रहेंगे, जहां उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शीर्ष अमेरिकी नेताओं से अहम बातचीत होगी। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान जंग को लेकर तनाव सातवें आसमान पर है, और दुनिया को उम्मीद है कि क्या इस मुलाकात से युद्ध रोकने की कोई राह निकल सकती है।
ऐसे में प्रवक्ता ने बताया कि 8 अप्रैल को रुटे, ट्रंप, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ बातचीत करेंगे। इस यात्रा के दौरान 9 अप्रैल को एक सार्वजनिक कार्यक्रम भी होगा, जिसमें रुटे के भाषण देने और रोनाल्ड रीगन प्रेसिडेंशियल फ़ाउंडेशन एंड इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित एक चर्चा में हिस्सा लेने की उम्मीद है।
NATO Trump meeting 2026: बढ़ते ईरान तनाव के बीच क्या निकलेगा शांति का रास्ता?
बता दें कि यह यात्रा ट्रांसअटलांटिक गठबंधन के लिए एक अहम समय पर हो रही है, क्योंकि ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष के बीच ट्रंप द्वारा NATO की हालिया आलोचना के बाद तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यूरोपीय सहयोगियों के प्रति अपनी गहरी नाराज़गी ज़ाहिर की है और उन पर अमेरिकी रणनीतिक लक्ष्यों को समर्थन देने के लिए पर्याप्त कदम न उठाने का आरोप लगाया है।
ट्रंप ने यहां तक संकेत दिया है कि अमेरिका इस 77 साल पुराने गठबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर पुनर्विचार कर सकता है, जिससे सदस्य देशों के बीच NATO के भविष्य को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। उन्होंने सहयोगियों की इस बात के लिए आलोचना की है कि वे यूरोप में अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक पहुँच को सीमित कर रहे हैं और होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे अहम वैश्विक मार्गों की सुरक्षा में आगे आने से हिचकिचा रहे हैं।
NATO Trump meeting 2026: रुटे-ट्रंप मीटिंग पर दुनिया की नजर
NATO अधिकारियों ने पुष्टि की है कि 8 अप्रैल को रुटे और ट्रंप के बीच होने वाली आगामी बैठक पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी, क्योंकि भू-राजनीतिक अनिश्चितता के इस दौर में यह बैठक गठबंधन की दिशा तय कर सकती है। नीदरलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री रुटे को पर्यवेक्षकों द्वारा “ट्रंप विस्परर” (ट्रंप को समझने वाला) कहा गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद से कई संकटों के दौरान भी उन्होंने अमेरिकी नेता के साथ रचनात्मक संबंध बनाए रखने की अपनी क्षमता का परिचय दिया है।
उन्होंने लगातार यह तर्क दिया है कि ट्रंप के दबाव ने यूरोपीय देशों को रक्षा खर्च बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है, जिससे अंततः NATO की क्षमताओं को मज़बूती मिली है। वॉशिंगटन में होने वाली इन चर्चाओं का मुख्य केंद्र गठबंधन की एकता, रक्षा संबंधी प्रतिबद्धताएं और तेज़ी से बदलते अस्थिर वैश्विक माहौल में रणनीतिक तालमेल बनाए रखना होने की उम्मीद है।


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