Nepal Election Results 2026: नेपाल में 5 मार्च को हुए संसदीय चुनाव के बाद अब वोटों की गिनती जारी है। इस बार चुनाव के नतीजों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बालेन शाह की लहर नजर आ रही है और देश में Gen-z की सरकार बनती हुई दिख रही है। बालेन शाह पूर्वी नेपाल के झापा-5 में पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली से आगे चल रहे हैं, जबकि देश के संसदीय चुनावों में आरएसपी ने बंपर 50 सीटों पर बढ़त बना ली है और बालेन शाह 60 हजार वोटों से आगे चल रहे है।
Nepal Election Results 2026: राजनीतिक दलों का दबदबा होगा खत्म

काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी के पूर्व मेयर बालेन शाह, ओली के पारंपरिक राजनीतिक गढ़ में प्रधानमंत्री पद के दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबले में हैं उनकी पार्टी, आरएसपी, भी शुरुआती वोटों की गिनती में बड़ी बढ़त बना रही है। आरएसपी देश की राजनीति में पारंपरिक राजनीतिक दलों के दशकों पुराने दबदबे को खत्म करना चाहती है।
आरसीपी चुनावी इलाकों में आगे चल रही है, उसके बाद नेपाली कांग्रेस है, जो तीन इलाकों में आगे है। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) दो इलाकों में आगे चल रही है, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री ओली की पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) को किसी भी इलाके में कोई बढ़त नहीं है। नेपाल में काठमांडू 1 सीट पर राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी की उम्मीदवार रंजू नेउपने ने जीत का परचम लहरा दिया है और जीत हासिल कर दी है।
Nepal Elections 2026: 165 सदस्य चुने जाएंगे

वोटों की गिनती फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (एफपीटीपी) सिस्टम के तहत चल रही है, जिसके आधार पर संसद के निचले सदन के 165 सदस्य चुने जाएंगे। 275 सदस्यों वाले निचले सदन को बनाने के लिए प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन सिस्टम के जरिए और 110 सदस्य चुने जाएंगे। शुरुआती नतीजों के अनुसार, तीन बड़ी राजनीतिक दलों, नेपाली कांग्रेस, सीपीएन-यूएमएल और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी, जो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) के विलय के बाद बनी थीं, इनका दशकों पुराना दबदबा खत्म हो सकता है।
Nepal Election 2026 Results: विरोध प्रदर्शन के बाद पहली बार चुनाव

नेपाल में पिछले साल सितंबर में जेन-जी विरोध प्रदर्शन के बाद पहली बार चुनाव हो रहे हैं, जिससे उस समय के प्रधानमंत्री के पी ओली के नेतृत्व वाली कोएलिशन सरकार गिर गई थी। नेपाल के लोगों में यह सोच बढ़ रही थी कि देश ट्रेडिशनल पार्टियों और उनके नेतृत्व की वजह से पीछे चल रहा है। यही कारण है कि नेपाल में जेन-जी का कड़ा विरोध शुरू हुआ था। जेन-जी प्रोटेस्ट के लगभग छह महीने बाद नेपाल में आम चुनाव हुए हैं।


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