Saudi Arabia Changes Stance on Iran War: ईरान के साथ चल रहे युद्ध को लेकर सऊदी अरब ने अचानक अपना रुख बदलते हुए चिंता जताई है। अब तक ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने वाला सऊदी अरब इस युद्ध के बढ़ने से परेशान नजर आ रहा है।
बताया जा रहा है कि सऊदी नेतृत्व ने अमेरिका के सामने युद्ध की रणनीति को लेकर असहमति जाहिर की है। इस मुद्दे पर हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच बातचीत भी हुई थी।
Saudi Arabia Changes Stance on Iran War: युद्ध की रणनीति पर सऊदी के सवाल
बता दें अमेरिका ईरान के बीच युद्ध को 1 महीने से ऊपर खिंच चुका है। माना जा रहा था कि युद्ध 4-5 दिन से आगे नहीं चल पाएगा, मगर इस युद्ध के लंबे खिंचने से युद्ध में शामिल देश तो प्रभावित ही हैं साथ में दुनिया के अलग अलग देशों में इसका असर हो रहा है। सबसे अधिक असर खाड़ी के उन देशों पर पड़ रहा है जहां से बड़ी मात्रा में ईंधन निर्यात होता है। इन देशों की अर्थव्यवस्था मुख्यत ईंधन पर निर्भर है।
इसी चलते, फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने इस युद्ध के लंबे खिंचने को लेकर चिंता व्यक्त की है। सऊदी का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबे समय तक चलता है तो इसका असर पूरे खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ सकता है।
साथ ही सऊदी को अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता है, क्योंकि उसके पास संभावित हमलों से निपटने के लिए पर्याप्त मजबूत रक्षा प्रणाली नहीं मानी जाती।
US Iran War: ट्रंप की रणनीति पर उठ रहे सवाल
ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति भी सवालों के घेरे में है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक महीने के दौरान ट्रंप कई बार युद्ध को तुरंत रोकने की बात कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं हुआ है।
डेमोक्रेट नेता और कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूजॉम ने भी ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिकी प्रशासन के पास इस संघर्ष से बाहर निकलने के लिए कोई स्पष्ट योजना नहीं दिखाई देती।
बताया जा रहा है कि इस युद्ध को लेकर अमेरिका का मुख्य उद्देश्य भी धीरे-धीरे बदलता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति अपने बयानों काफी फेरबदल कर रहे हैं। अब वाशिंगटन की कोशिश यह है कि किसी तरह संघर्ष को सीमित किया जाए और होरमुज मार्ग को दोबारा सुरक्षित तरीके से खोला जा सके, क्योंकि यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है।
Middle East Tension: सऊदी ने क्यों बदला अपना रुख?

1. तेल और ऊर्जा ठिकानों पर हमले का खतरा
यदि युद्ध लंबा चलता है तो इसका सबसे बड़ा खतरा सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों को हो सकता है। हाल ही में ईरान की ओर से सऊदी के ऊर्जा ठिकानों को संभावित निशाने की सूची में शामिल किए जाने की खबरें सामने आई थीं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी संकेत दिया था कि जब तक सऊदी अरब में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद रहेंगे, तब तक वहां हमलों का खतरा बना रह सकता है।
2. ईरान को कमजोर करने की रणनीति पर संशय
सऊदी अरब को पहले उम्मीद थी कि इस संघर्ष के जरिए ईरान की राजनीतिक और सैन्य ताकत कमजोर हो सकती है। हालांकि, होर्मुज को लेकर अमेरिका की बदलती रणनीति ने सऊदी नेतृत्व की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
सऊदी को आशंका है कि अगर ईरान को निर्णायक रूप से कमजोर नहीं किया गया, तो भविष्य में उससे टकराव और अधिक खतरनाक साबित हो सकता है।
3. हूती विद्रोहियों के सक्रिय होने का डर
ईरान से जुड़े हूती विद्रोहियों के सक्रिय होने की संभावना भी सऊदी के लिए बड़ी चिंता है। हूती समूह पहले से ही सऊदी अरब का विरोधी माना जाता है। ऐसे में यदि संघर्ष बढ़ता है और हूती विद्रोही सीधे सऊदी पर हमले शुरू करते हैं, तो देश की सुरक्षा चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
4. ट्रंप की टिप्पणी से बढ़ी नाराजगी
सऊदी के रुख में बदलाव की एक वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणी भी मानी जा रही है। ट्रंप ने एक बयान में कहा था कि सऊदी के क्राउन प्रिंस को अब उनकी प्रशंसा करनी पड़ेगी, जबकि पहले वे ऐसा नहीं करना चाहते थे।
इस टिप्पणी को लेकर भी सऊदी नेतृत्व के भीतर असहजता बताई जा रही है, जिससे दोनों देशों के संबंधों में हल्की खटास आने की चर्चा है।
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