Shortage of LPG : मौजूद समय दुनियाभर के लिए संकट के हैं, यह संकट न सिर्फ आर्थिक पैमानों पर हैं, बल्कि तीसरे विश्वयुद्ध की दहलीज पर पूरी दुनिया खड़ी है, जहां एक धक्का और मिलने से सब कुछ उथलपुथल हो जाएगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और Strait of hormuz में खतरे की आशंकाओं के बीच भारत में गैस सप्लाई को लेकर पैनिक तेज हो गया है। कई जगहों से ऐसी वीडियो देखने को मिल रही हैं जहां आम लोग गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़े हैं।
कई जगह गैस के लिए लोगों की झड़प की भी खबरे हैं। यह सिर्फ इसलिए क्योंकि दुनिया का 20 प्रतिशत सप्लाई जिस रास्ते से होकर गुजरता है वह रास्ता लगभग चोक कर लिया गया है। उस रास्ते पर ईरान ने डेरा जमा लिया है, जिस चलते भारत में गैस की शॉर्टज की कमी की बात हो रही है।
बता दें, ईरान पर अमेरिका और इसराइल के ताबड़तोड़ हवाई हमलों के बीच ईरान ने Strait of hormuz से तेल टैंकरों की आवाजाही को रोक दिया है। इसी रास्ते से चीन, जापान और भारत समेत कई देशों को तेल और गैस की सप्लाई होती है. बीते कुछ दिनों में हालात तेज़ी से बदले हैं. यह युद्ध 28 फरवरी से लगातार जारी है। जिसका असर भारत पर दिखना शुरू हो गया है।
Middle East Conflict Impact on India: भारत पर पड़ रहा युद्ध का असर

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार, भारत लिक्विफ़ाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) का दुनिया में चौथा सबसे बड़ा और एलपीजी का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश है. ये आयात मुख्य रूप से मध्य पूर्व से किए जाते हैं, जहां अभी संघर्ष चल रहा है. और इसका एक बड़ा हिस्सा Strait of hormuz से होकर गुजरता है।
बता दें, क़तर LNG का सबसे बड़ा उत्पादक देश है और उसने युद्ध के चलते इसका उत्पादन रोक दिया हैवहीं कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि भारत मध्य पूर्व से अपनी ज़रूरत का अधिकांश एलपीजी और दो तिहाई एलएनजी ख़रीदता है. जानकारी के अनुसार क़तर भारत का सबसे बड़ा एलएनजी सप्लायर है, जो पिछले साल भारत के कुल एलएनजी आयात का आधा था.
Shortage of LPG : अब समझिए कहां हो रही है दिक्कत
दिक्कत इसी कतार से LNG लेने पर हो रही है। दुनिया की महाशक्तियां अपने हितों के चलते ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं जिससे दुनिया पर असर पड़ रहा है। ईरान ने strait of hormuz का रास्ता रोक दिया है। strait of hormuz जिसे फारसी में होरमुज़ जलडमरूमध्य भी कहा जाता है पश्चिम एशिया की एक अहम समुद्री रास्ता है, जो ईरान के दक्षिण में फ़ारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से अलग करता है।
इसके साउथ में संयुक्त अरब अमीरात और ओमान का मुसन्दम नाम का एरिया है। तेल के एक्सपोर्ट के लिहाज से यह रास्ता बहुत जरूरी माना जाता है क्योंकि इराक़, क़तर तथा ईरान जैसे देशों का तेल निर्यात दुनियभार में यहीं से होता है। अब जानिए कि ईरान के साउथ में पड़ने वाला यह समुद्री रास्ता मात्र 33 किलोमीटर ही है, अपने सबसे कम चौड़े रास्ते होने के चलते ईरान इस पर अपना दबाव बनाता है, जो इस युद्ध में देखा जा रहा है।
ईरान इस युद्ध में इस रास्ते को अपना हथियार बना रहा है और दुनिया की सप्लाई रोक रहा है। बता दें, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत ये वो देश हैं जहां से गैस की आपूर्ति पूरी होती है।
क्या कहा मंत्रालय ने
मंगलवार को भारत के पेट्रोलियम मंत्रालय ने strait of hormuz को लेकर अपने बयान में कहा, कहा, “मध्य पूर्व में चल रहे मौजूदा संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से एलएनजी की शिपमेंट बाधित है. नए नियम बराबर वितरण को सुनिश्चित करने और प्रमुख सेक्टर्स के लिए लगातार उपलब्धता बनाए रखने के लिए बनाए गए हैं.”
Crude Oil Supply: कच्चे तेल की आपूर्ति पर सबसे बड़ा खतरा
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है और इसमें से 40 से 60 प्रतिशत हिस्सा इसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत पहुंचता है. इराक, सऊदी अरब, कुवैत और यूएई जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी मार्ग का उपयोग करते हैं. यदि इस मार्ग पर तनाव बढ़ता है और जहाजों की आवाजाही रुकती है, तो भारत के रणनीतिक भंडार कुछ हफ्तों तक ही काम आएंगे. इसके बाद देश में परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है और माल ढुलाई महंगी होने से महंगाई आसमान छूने लगेगी.
विदेश भारत कैसे पहुंचती है गैस

विदेशों से LPG भारत तक एक लंबी सप्लाई चेन के जरिए पहुंचती है। इसे नीचे 6 चरणों से समझते हैं-
पहला चरण : गैस टैंकर जहाज- मिडिल ईस्ट के गैस टर्मिनल से LPG को बड़े गैस टैंकर जहाजों में भरा जाता है।
दूसरा चरण : समुद्री यात्रा – ये जहाज समुद्र के रास्ते भारत की ओर आते हैं।
तीसरा चरण: भारतीय बंदरगाह- भारत में LPG इन बड़े बंदरगाहों पर उतरती है। जिसमें
- कांडला
- मुंद्रा
- मुंबई
- कोच्चि
- विशाखापत्तनम मुख्य हैं।
चौथा चरण : बॉटलिंग प्लांट- पोर्ट से LPG को टैंकरों के जरिए बॉटलिंग प्लांट में भेजा जाता है, जहां इसे सिलिंडरों में भरा जाता है।
पांचवां चरण: गैस एजेंसी – सिलिंडर गैस एजेंसियों तक भेजे जाते हैं।
छठा चरण: घर तक डिलीवरी – आखिर में डिलीवरी एजेंट सिलिंडर आपके घर तक पहुंचाते हैं।
Domestic LPG Supply Crisis: घरेलू LPG की सप्लाई कहां से

- इंडियन ऑयल
- भारत पेट्रोलियम
- हिंदुस्तान पेट्रोलियम
हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) मुख्य रूप से भारत सरकार की कंपनी है, जो पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन आती है। 2018 से, भारत सरकार के स्वामित्व वाली ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) ने इसमें 51.11% से अधिक हिस्सेदारी (54.90% तक) खरीद ली है, जिससे HPCL अब ONGC की सहायक कंपनी बन गई है।
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) भारत सरकार के स्वामित्व वाली एक महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी (PSU) है यह पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के स्वामित्व में है और देश की दूसरी सबसे बड़ी तेल शोधन और विपणन कंपनी है। इसे ‘महारत्न’ का दर्जा प्राप्त है और यह भारत सरकार के अधीन कार्य करती है।
वहीं, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) भारत सरकार के स्वामित्व वाली एक महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी (PSU) है, जो पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करती है।
LPG गैस क्या होती है?
LPG का पूरा नाम Liquefied Petroleum Gas है। यह एक ज्वलनशील ईंधन है जो मुख्य रूप से दो गैसों के मिश्रण से बनती है। पहला, प्रोपेन (Propane), दूसरा ब्यूटेन (Butane)। सामान्य तापमान पर ये गैसें गैस के रूप में होती हैं, लेकिन जब इन्हें दबाव में रखा जाता है तो ये तरल बन जाती हैं। यही वजह है कि LPG को सिलिंडर में तरल रूप में भरकर रखा जाता है।जब आप गैस चूल्हा चालू करते हैं और रेगुलेटर से गैस निकलती है, तो वह फिर से गैस बन जाती है और जलकर खाना पकाने में इस्तेमाल होती है।
आइए जानें LPG गैस बनती कैसे है
LPG मुख्य रूप से दो तरीकों से तैयार होती है। एक कच्चे तेल की रिफाइनिंग से। कच्चे तेल (Crude Oil) को रिफाइनरी में गर्म करके अलग-अलग उत्पादों में बदला जाता है। इस प्रक्रिया को फ्रैक्शनल डिस्टिलेशन कहा जाता है। इस दौरान पेट्रोल, डीजल, केरोसीन, एटीएफ जैसे उत्पाद निकलते हैं। इसी प्रक्रिया में प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी गैसें भी निकलती हैं, जिन्हें अलग करके LPG बना दी जाती है।
दूसरा, प्राकृतिक गैस प्रोसेसिंग से। कई गैस फील्ड में मिलने वाली प्राकृतिक गैस के साथ भी प्रोपेन और ब्यूटेन मौजूद होते हैं। गैस प्रोसेसिंग प्लांट में इन्हें अलग किया जाता है और फिर LPG तैयार की जाती है।
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