योगी सरकार का बड़ा कदम, 73 हजार हेक्टेयर में ड्रिप इरीगेशन, गन्ना किसानों को मिल रहा फायदा

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Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने किसानों के हित को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा है। पिछले करीब 9 वर्षों में सरकार ने खेती को लाभकारी बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। नई तकनीकों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। इसी दिशा में गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया है, जिससे किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। गन्ना किसानों के बीच ड्रिप इरीगेशन यानी बूंद-बूंद सिंचाई प्रणाली को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इस तकनीक में…

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने किसानों के हित को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा है। पिछले करीब 9 वर्षों में सरकार ने खेती को लाभकारी बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। नई तकनीकों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। इसी दिशा में गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया है, जिससे किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है।

गन्ना किसानों के बीच ड्रिप इरीगेशन यानी बूंद-बूंद सिंचाई प्रणाली को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इस तकनीक में पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है, जिससे पानी की बर्बादी नहीं होती। विभाग के अनुसार, जो किसान इस प्रणाली को अपना रहे हैं, उनके गन्ना उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह तरीका न सिर्फ उत्पादन बढ़ा रहा है बल्कि खेती को अधिक टिकाऊ भी बना रहा है।

Uttar Pradesh News: पानी और उर्वरक की बचत

ड्रिप इरीगेशन का एक बड़ा फायदा यह है कि इसमें पानी की काफी बचत होती है। अनुमान है कि इस तकनीक से करीब 50 प्रतिशत तक जल की बचत संभव हो रही है। साथ ही उर्वरकों का उपयोग भी अधिक प्रभावी तरीके से किया जा रहा है, क्योंकि इन्हें पानी के साथ सीधे पौधों तक पहुंचाया जाता है। इससे उर्वरकों की बर्बादी कम होती है और किसानों का खर्च भी घटता है। कम लागत और बेहतर उत्पादन के कारण किसानों की आय में बढ़ोतरी हो रही है।

पिछले 9 वर्षों में प्रदेश में लगभग 73,078 हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र में ड्रिप इरीगेशन सिस्टम स्थापित किया जा चुका है। इसके सकारात्मक परिणाम देखकर अधिक से अधिक किसान इस तकनीक को अपनाने लगे हैं। खास बात यह है कि इस पद्धति की मदद से कम वर्षा वाले और क्षारीय मिट्टी वाले क्षेत्रों में भी गन्ने की सफल खेती संभव हो पाई है।

एथनॉल उत्पादन में बढ़ोतरी

गन्ना क्षेत्र में सुधार के साथ-साथ एथनॉल उत्पादन में भी प्रदेश ने बड़ी प्रगति की है। वर्ष 2017 तक उत्तर प्रदेश की केवल 37 चीनी मिलों में एथनॉल प्लांट लगे थे, जिनकी कुल क्षमता करीब 88 करोड़ लीटर सालाना थी। हालांकि, उस समय उत्पादन लगभग 42 करोड़ लीटर ही हो पाता था।

वर्तमान स्थिति में 53 चीनी मिलों में एथनॉल उत्पादन की क्षमता बढ़कर करीब 258 करोड़ लीटर सालाना हो गई है। इसके साथ ही वास्तविक उत्पादन भी बढ़कर लगभग 137 करोड़ लीटर तक पहुंच चुका है। यह वृद्धि न केवल किसानों के लिए लाभकारी है, बल्कि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भी मददगार साबित हो रही है।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।